अल्फाज़

अल्फाज़

तू  वक़्त न यूँ  ज़ाया  कर  ,

        अल्फाज़  मेरे समझने में  |

दिल से सुन  ज़ज्बात मेरे   ,

         देर ना क़र तू  समझने में  ||

वो बात क्या जो कहनी पड़े  ,

      मै कुछ ना कहूं तू सब सुन भी ले ||

बात जो छुपी है दिल में 

      मज़ा क्या जुबाँ से उसको कहने में ||

जान न  ले ये सारा जहाँ ,

     यूँ प्यार  का इजहार ना क़र  |

कोशिश तो क़र के देख ज़रा

       दिल से दिल को पढ़ने में ||

ख़्वाबों  में तू आजा मेरे

        मिलने की कोशिश  ना क़र |

ये तू जाने या मै जानू ,

         तू  शोर ना क़र ज़माने  में ||

 क्या समझेगा ज़माना ये  ,

         दो दिलो की इन बातों को |

मै तेरे दिल में तू मेरे दिल में

         चलो देर करो ना छुपने  में ||

आँखों के ये राज हैं जो  ,

         आँखों में ही छुपे रहने दो |

 जाहिर करो न यूँ इनको

        खो जाने दो इन्हें सपने में ||

तू वक्त ना यूँ  ज़ाया  क़र  ,

           अल्फाज़  मेरे समझने

रीता सिंह

बैंगलोर

कविता और कहानी