इंसान को इंसान समझो तो बात बनेगी

इंसान को इंसान समझो तो बात बनेगी

इंसान को इंसान समझो तो बात बनेगी

अच्छे संस्कार व्यवहार में लाओ तो बात बनेगी।

दूसरों के दोष खोजने में ना लगा दो जिंदगी

कुछ अपनी तरफ देखो तो बात बनेगी।

सिर्फ थियोरी में ही ना अटके रहो

कुछ प्रैक्टिकल हो तो बात बनेगी ।

किसी का किसी से कोई झगड़ा ही नहीं

एक दूसरे को समझो तो बात बनेगी।

दूषित कर रहे हैं प्लास्टिक के बने आइटम

तुम थैला साथ लेकर चलो तो बात बनेगी।

काट रहे हैं लोग पेड़ और जंगलों को

तुम दस बीस पेड़ लगाओ तो बात बनेगी।

पर्यावरण पर रोज़ देते हो भाषण बेकार

छोड़कर कार साईकिल से चलो तो बात बनेगी

बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ का नारा तो अा गया

बेटियों की पहले इज्ज़त बचे तो बात बनेगी।

नारियां देवियां हैं इस धरा पर समझ लो

इनकी इज्ज़त करो तो बात बनेगी।

समस्या पानी की ले रही है विकराल रूप

ज्यादा  से ज्यादा पानी बचाओ तो बात बनेगी।

सूरज की रोशनी,धूप,ताप जा रहा है बेकार

सोलर एनर्जी का यूज करो तो बात बनेगी।

सबको साश्चर करने का जिम्मा सिर्फ सरकार का नहीं

कुछ गरीब बच्चों को तुम भी पढ़ा दिया करो तो बात बनेगी।

विदेशी चीज़े लुभावनी तो जरूर लगती हैं

देसी शुद्ध चीजों का इस्तेमाल करो तो बात बनेगी।

एलोपैथी दवाइयों का असर तुमने देख लिया

अब प्राकृतिक चिकित्सा अपनाओ तो बात बनेगी।

फास्ट फूड के परिणाम सबके सामने हैं

दादी नानी की रसोई से प्यार करो तो बात बनेगी।

जो चारपाइयां हम छोड़ चुके हैं मुद्दत पहले

सोलह हजार की बिकती है अमेरिका में

फिर से हम इस्तेमाल करें तो बात बनेगी।

ओम है इस ब्रह्माण्ड को चलाने वाले का नाम

थोड़ा उसका भी जाप करें तो बात बनेगी।

नासा ने बताया सूर्य से निकलती है आवाज ओम की

अब सब होश में आओ तो बात बनेगी।

रीसाइक्लिंग वाले प्रोडक्ट्स यूज करो तो बात बने। प्रकृति से संबंध मजबूत करो तो बात बनेगी।

बहुत सी बातें हैं जो मैं लिख नहीं सकता

आप खुद खोज के पढ़ लो तो बात बनेगी।

हीरेंद्र चौधरी ‘” जापानी”\

बी वन साथ दो (बी१/७२)

गोल्ड क्रॉफ्ट सोसाइटी

प्लॉट नं ४, सेक्टर ११

द्वारका, नई दिल्ली

कविता और कहानी