उत्तराखण्ड के पहाड़ अब दरक रहे है़

उत्तराखण्ड के पहाड़ अब दरक रहे है़

उत्तराखण्ड के पहाड़ अब दरक रहे है़

टूट कर धीरे धीरे खिसक कर सरक रहे है़ !

टूट कर चूर हो रहा है़ अब उत्तराखण्ड का सीना

मुश्किल होता जा रहा है़ अब पहाडो मे जीना !

जगह जगह उत्तराखण्ड मे आपदाएँ मुँह पसारे है़ ,

पहाडो मे प्रसिध्द अलकनन्दा मंदाकिनी दो धारे है़ !

उत्तराखण्ड से हर व्यक्ति का होता पलायन मुसीबतों का सरकार है़ ,

सभी ऐश-ओ-आराम कि सुविधाएं है़ यहाँ जिसकी लोगों को दरकार है़ !

छोड़ गढ़वाल को मत जाओ देश करके झूटा बहाना ,

इरादे रखो साफ़ तुमको फ़िर पड़ेगा गढ़वाल आना !

मेरे उत्तराखण्ड मे आजकल हर तरफ़ चौमुखी विकास दर है़ ,

देवप्रयाग मे खुली शराब क़ी भट्टी मंत्री अपना तो क्या डर है़ !

उत्तराखण्ड मे बह रही है़ नदिया झरने विकराल बनकर ,

काश्तकार व जरूरतमंदों को हो रही है़ समस्याये सुनामी बनकर !

मार्टिन उमेद

कविता और कहानी