कच्चे धागों का पक्का बंधन रक्षाबंधन का त्योहार

कच्चे धागों का पक्का बंधन रक्षाबंधन का त्योहार

डॉक्टर सुधीर सिंह

कच्चे धागों का पक्का बंधन रक्षाबंधन का त्योहार,
पूजा की थाली में राखी बहन का  है अनुपम प्यार.

भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक यह पावन पर्व,
वर्ष में एक बार आता है भाई-बहन का यह उत्सव.

ससुराल में बस गई बहना करती  भैया का इंतजार,
रेशम की डोरी में लिपटा है बहन काअनमोल प्यार.

आज जो भी मांगूंगी भैया उसको  तुम्हें  देना होगा,
बहन की रक्षा का बोझ भाई  को  उठाना  ही होगा.

भाई के  दिर्घायु होने  की  कामना  करती है बहना,
तुम्हारी रक्षा करेगा भाई,आजीवन तू बेफिक्र रहना.

राखी की प्रतीक्षा करता है  सरहद  पर सैनिक भाई,
पवित्र धागे से सज जाती है सेनानी की सूनी कलाई.

भाई से बहन कहती रहती है, भारत की रक्षा करना;
अराजक तत्वों को समाज में कभी पनपने नहीं देना.

रक्षाबंधन याद दिलाता  छोटी-बहन  के नाज-नखऱे,
राखी बंधी कलाई से दुलारी बहन को भाई है पकड़े.

कविता और कहानी