किसी का आँसू पोंछ कर तो देखिए

किसी का आँसू पोंछ कर तो देखिए

डॉक्टर सुधीर सिंह

किसी का आँसू पोंछ कर तो देखिए,

गिरते हुए को संभालकर तो देखिए।

प्रभु की प्रेरणा से ही सत्कर्म होता है,

प्रेरणा कोआत्मसात करना सीखिए।

किसी को पता नहीं कब क्या होगा?

फिर भी आदमी अभिमान करता है।

थोड़ा  सा  धन-बल-पद पा  लेने पर,

इंसान ही इंसान को चूसने लगता है।

समय की चाल समझना सहज नहीं,

कभी भी  वक्त करवट ले सकता है।

राम को युवराज  पद मिलते-मिलते,

अचानक वनवासी  बनना पड़ता है।

समय किसी  का भी  गुलाम नहीं है,

परिस्थिति का दास आदमी रहता है।

फिर भी इंसान अहंकार में फंस कर,

विनाश कीअग्नि में जलने लगता है।

कविता और कहानी