कोरोना

कोरोना

फोकट में काहे का रोना।

बड़ा नही है ये बगरौना।।

अगर प्यार परिवार से है तो

घर के बाहर पांव धरो ना।।

नाक आँख मुंह टच मत करना।

बार-बार हाथों को धोना।।

देखो लॉकडाउन ना टूटे।

जबरन घूमो, व्यर्थ मरो ना।।

सामाजिक डिस्टेन्स बनाओ।

बीच में आकर यार धसो ना।।

बाहर जाओ मास्क लगाओ।

भीड़भाड़ से मत चिपको ना।।

स्वागत में न हाथ बढ़ाओ।

भागेगा “बेशर्म” कोरोना।।

विजय बेशर्म 

गाडरवारा मप्र 

9424750038

कविता और कहानी