क्या ख़ाक विकास ?????

क्या ख़ाक विकास ?????

कितने महान हैं

मेरे देश के लोग

जो स्वयं ही जला लेते हैं

अपने ही घरोंदे

अपने ही शहर

अपने ही स्कूल

अपने ही हस्पताल

अपनी ही बसें

अपनी ही ट्रेनें

तोड़ देते हैं अपनी ही सड़कें

आज हमें किसी अफजल या

मुकमल दुश्मन पाकिस्तान की आवश्यकता नहीं है

सुना है दुकानें ही नहीं लूटी हैं

अस्मतें भी लुटी गई हैं

आज शहरों की जली हुई

दीवारें ही काली नहीं हैं

कुछ अंजान चेहरे भी कालिख से पुते हैं

इंसानियत के लिए बैचनी ज़रूरी है

वर्ना भारत को सीरिया बनते देर नहीं लगेगी

आज बदनुमा-सा दाग नजर आता है

“मेरा भारत महान” लिख देना नाकाफी है

महान देश के जिम्मेदार नागरिक बनना भी ज़रूरी है

अंत में बस इतना ही

एक विचार –

“जिस देश के लोगों में पिछड़ा बनने की होड़ लगी हो,

वो क्या ख़ाक विकास करेगा ??????????

कविता और कहानी