जाने से पहले

जाने से पहले

जाने से पहले करना ऐसा,

जनजीवन तेरा नमन करें।

कुछ ऐसा कर जाना साथी,

दुनिया हरदम गुणगान करे।

राम और कृष्ण की ये धरती,

निशि दिन तुझको नमन करे।

आदर्शों पर तेरे नित चलकर,

अपने देश का गौरव वहन करें।

जो मान और सम्मान बढाये ,

कर्मों का ऐसा ही चलन रहे।

उठा रहे सदा भाल भारत का,

सरहद पर ऐसा ही तनय रहे।

जाने से पहले दुनिया से बन्धु,

दुनिया को तू मधुपूरित कर दे।

जलन द्वेष व नफरत सब भूलें,

मानवता का सुंदर चमन फले।

बन्धुत्व भाव सबके मन उपजे,

नफ़रत की सब विष वेलि जले।

सुन्दरतम अपनी है यह धरती ,

सुन्दरता इसकी दिन रात बढ़े।।

डॉ सरला सिंह स्निग्धा

दिल्ली

कविता और कहानी