जाहि विधि राखे राम ….

जाहि विधि राखे राम ….

आज सुबह से कोई काम ठीक से नहीं हो पाया। पिछले एक महीने से इस प्रोजेक्ट में लगा हुआ था रोहित। बॉस ने उसकी प्रेजेंटेशन रिजेक्ट करके उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। रोहित ने कार पार्किंग में खड़ी की और यही सब सोचते हुए तेज़ी से अपने फ्लैट की ओर बढ़ गया। उसकी पत्नी नेहा ने मुस्कुराकर दरवाजा खोला लेकिन उसका उतरा हुआ चेहरा देखकर वह समझ गई कि रोहित का मूड आज ठीक नहीं है। इसलिए नेहा ने कुछ नहीं पूछा और काम में व्यस्त हो गई। रोहित नहाकर आया। सोफे पर बैठकर टीवी चलाया लेकिन थोड़ी देर चैनल बदलकर फिर बन्द कर दिया। बैग से लैपटॉप निकालकर काम करने बैठ गया। नेहा तब तक डायनिंग टेबल पर खाना लगा चुकी थी। ” रोहित पहले खाना खाओ। ठंडा हो जाएगा।” उसने रोहित के पास आकर कहा।,” नहीं यार, मुझे कुछ ज़रूरी काम निपटाना है। तुम खा लो । वैसे भी भूख नहीं है मुझे।” रोहित ने अपने काम में लगे हुए ही जवाब दिया। नेहा को थोड़ा गुस्सा आया लेकिन खुद पर काबू रखते हुए उसने पूछा,” कुछ बताओगे क्या हुआ है ? तुम्हारी प्रेजेंटेशन कैसी रही ? बात करोगे तो मन हल्का हो जाएगा। तनाव में भूख नहीं लगेगी।” रोहित ने लैपटॉप बन्द कर दिया और नेहा की ओर देखते हुए बोला,” होना क्या था। पूरे महीने की मेंहनत पर पानी फिर गया। अब फिर से बनानी पड़ेगी। बॉस को पसंद नहीं आई।” नेहा ने उसे समझाते हुए कहा,’ रोहित आज का दिन तुम्हारा नहीं था लेकिन ऐसा नहीं है कि कल का दिन भी ऐसा ही होगा। मुझे विश्वास है तुम एक और अच्छी प्रेजेंटेशन बना लोगे।’ तभी दरवाजे की घंटी बज गई। दरवाजा खोला तो सामने वाले फ्लैट में रहने वाले व्यासजी  की माताजी आईं थीं।,” नेहा और रोहित कल रामायण का पाठ पूरा हो जाएगा। शाम को इसी समय आरती होगी। ऑफिस से आकर तुम दोनो आरती में शामिल होना।” जी आंटी ज़रूर। आप बैठिए ना।” नेहा ने उनसे आग्रह किया। रोहित मुंह बनाकर वहां से उठकर चला गया। आंटी समझ गई। उन्होंने नेहा से कहा,” बेटा लगता है रोहित किसी बात से परेशान है, उसे बोलना हम कितना भी परेशान हो लेकिन मालिक की जब तक रजा नहीं होती, हमारा काम नहीं बनता। जब भी कोई समस्या आए, हाथ जोड़कर दिल से कहो,” मालिक तेरी रजा रहे।” और चमत्कार हो जाता है।” कहकर आंटी वापस चली गई। रोहित उनकी बात सुन रहा था। नेहा से बोला,” तुम कैसे विश्वास कर लेती हो इन ढकोसलों पर। अगर इस तरह सब हाथ पर हाथ रखकर बस यही कहते रहें,”मालिक तेरी रजा रहे” तो दुनिया रुक जाएगी।” नेहा उससे बहस नहीं करना चाहती थी इसलिए उसने इतना ही कहा,” ऐसा उनका विश्वास है रोहित, हम किसी के विश्वास को ग़लत नहीं कह सकते। पूजा पाठ से अगर किसी को मानसिक शांति मिलती है तो हम विरोध क्यूं करें। वातावरण की शुद्धि के लिए भी लोग पूजा पाठ करते हैं।” रोहित उसकी बात से सहमत नहीं था इसलिए फिर से अपना लैपटॉप लेकर बैठ गया।

नेहा भी बात को बढ़ाना नहीं चाहती थी इसलिए बचे हुए काम समेटने लगी। रोहित काम करते करते भी बडबडा रहा था, थोड़ी देर काम करके सोने चला गया। काम खत्म करके नेहा भी बिस्तर पर लेट गई।

सुबह नेहा और रोहित दोनों ही ऑफिस के लिए निकल गए। नेहा का ऑफिस रास्ते में पड़ता था, कार से उतरते हुए नेहा ने रोहित को याद दिलाया,” रोहित शाम को जल्दी आने की कोशिश करना।” रोहित ने कार चलाते चलाते ही उत्तर दिया,” देखता हूं। देर हुई तो तुम अकेले ही चले जाना।” नेहा उसका इशारा समझ गई। उसने मुस्कुराकर, हाथ हिलाकर बाय किया और ऑफिस के अंदर चली गई।

शाम को नेहा पूजा में जाने के लिए तैयार हो रही थी तभी रोहित ने गुनगुनाते हुए अंदर प्रवेश किया। नेहा के आश्चर्य की सीमा नहीं रही जब रोहित ने कहा कि वह भी पूजा में साथ चलेगा। वह भी प्रसाद लेना चाहता है।

नेहा और रोहित को साथ देखकर आंटी बहुत खुश थी। पूजा संपन्न हुई तो उन्होंने प्रसाद का वितरण किया। रोहित ने आशा के विपरीत प्रसाद लेकर उनके चरण स्पर्श किए। घर आकर नेहा खुद को रोक नहीं पाई। उसने पूछ ही लिया,” आज अचानक भगवान में विश्वास कैसे हो गया रोहित ?” रोहित भी जैसे बताना ही चाहता था,” नेहा कल मैं इतना परेशान था कि आंटी की बात भी मानकर देखी। रात में बिस्तर पर आंख बंद करके यही बोलता रहा,” मालिक तेरी रजा रहे”। आज प्रेजेंटेशन इतना अच्छा हुआ कि बॉस ने सीधे प्रोमोशन ही कर दिया है। मैं खुद भी नहीं समझ पाया कि क्या हुआ है ? कल वही प्रेजेंटेशन रिजेक्ट हो गई थी। तुम्हारी आंटी के भगवान को धन्यवाद देने गया था। बस।” नेहा ने रोहित को बधाई देते हुए कहा,” रोहित, आंटी के मालिक तेरी रजा रहे ने तुम्हारे दिमाग को शांत कर दिया और तुम एक अच्छी प्रस्तुति दे पाए।” रोहित तो एक भजन बजाकर आंख बंद करके सुनने में मशगूल था।

अर्चना त्यागी

कविता और कहानी