जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं,वह देश मूक है

जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं,वह देश मूक है

डॉक्टर सुधीर सिंह

‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां:-
जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं;वह देश मूक है.
हिंदी से हिंदुस्तान की पहचानअचूक है.
हिंदी हिंदुस्तान  की लोकप्रिय  भाषा है,
हिंद की एकता की  उत्कृष्ट परिभाषा है.
समृद्ध हिंदी हेतु मिलकर सत्प्रयास करें,
आइए!हिंदी में काम करने की शपथ लें.
बच्चों को शिक्षा मिले हिंदी के ही जरिए,
अंग्रेजी को उसकी दासी बनाकर रखिए.
मौलिकता पनपती हैअपनी ही भाषा से,
माँ  जैसा प्यार करें  अपनी राष्ट्रभाषा से.

कविता और कहानी