तुम कहाँ नही हो ?

तुम कहाँ नही हो ?

चलो ढूढ़ कर, दिखाओ मेरे एहसासो में तुम कहाँ नही हो
कोई ऐसी जगह बताओ जहा तुम नही हो

थक जाओगे मन की नगरी चलते चलते
मान लोगे हार जो पाओगे हर जगह खुद को
चलो ढूढ़ कर दिखाओ मेरे एहसासो में तुम कहाँ नही हो

ऐसे हीं तो तुम तब हार गए थे जब कररहे थे मेरी और तुम्हारी चाहतो का हिसाब
कि कौन किसको चाहेगा हर एहसास से ज्यादा

और देखो आज में हीं जीत गयी तुमसे
तुमने तो छोड़ दिया मेरे तुम्हारे हर एहसास को

में आज भी खेल रही हूँ आँखे बंद करके तुम्हारे एहसासो में खो जाने वाली आँख मिचौली का खेल

मगर फिर भी चलो तुम ढूढ़ कर दिखाओ मेरे एहसासो में तुम कहाँ नही हो

कोई तो ऐसी जगह बताओ जहां तुम नही हो
सीमा तोमर
गाज़ियाबाद

कविता और कहानी