दिल्लीे का दर्द आइए मिलकर बाँट लें

दिल्लीे का दर्द आइए मिलकर बाँट लें

डॉक्टर सुधीर सिंह

दिल्ली का दर्द आइए मिलकर बाँट लें,
शांति के लिए वहां  सब सत्प्रयास करें.
दंगों का दर्द फिर कभी नहीं उभरे यहां,
प्रत्येक हिंदुस्तानीआज दृढ़-संकल्प लें.
सनेेह-सहयोग,सद्भावना और क्ष्रद्धा से;
अमन-चैन, शांति का प्रादुर्भाव होता है.
भाईचारे का भावआमलोगों में आने से,
घर-बाहर सर्वत्र प्रेमपुष्प खिल जाता है.
प्रेम और प्रेरणा में  दिव्य शक्ति होती है,
भेदभाव वह कभी अंकुरने नहीं देता है.
पुरखों ने सिखाया  ‘वसुधैव कुटुम्बकम’,
सब इंसान को जो प्रेम-सूत्र में बाँधता है.
भारत माँ कहती है, मेरी बात सुन वत्स!
प्रत्येक हिंदुस्तानी यहां मेरी ही संतान है.
हम चाहते है,सब बच्चे मिलजुलकर रहें,
सुयोग्य संतान ही  माँ  का स्वाभिमान है.

कविता और कहानी