नयी उम्मीदों की ओर

नयी उम्मीदों की ओर

हर वर्ष बीतता है और नये वर्ष में जीवन और जगत के लिए हम नयी संभावनाएँ तलाशते हैं।समय का यह कल्पित टुकड़ा समय के अन्य कल्पित टुकड़े सेस्वयं को जोड़ विगत को आगत और भविष्य से जोड़ता चलता है।इस अनवरत चलते कालक्रम को हम वर्षों में अगर बाँटते है तो  पिछला वर्ष मानव जगत के लिए कुछ विशेष सुखकर नहीं रहा।सबसे बड़ा संकट एक विषाणु रहा जिसने करोड़ों की जान ले ली। मानव जीवन का बहुत बड़ा संकट वन उसे निरंतर भयभीत करता रहा। वर्तमान वर्ष के मार्च महीने से ही इसने हमारे देश को बुरी तरह आन्दोलित कर दिया।इसे अपने देश से दूर करने के लिए हमने विभिन्न विश्वासों का भी परीक्षण कर लिया।प्रकाश और ध्वनि कीशक्तियों के परीक्षण का परिणाम बस इतना निकला कि इस रोग को भगाने केलिया सारे भेदभाव भूल सम्पूर्ण राष्ट्र ने एकजुट संकल्प का प्रदर्शन  किया। यह जो संकट के समय की भारत की सबसे बड़ी शक्ति है, उसका हम सब को एहसास हो गया।आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों वाली दवाईयाँ और कुछ होम्योपैथिक दवाओंने भी अपनी शक्तिशाली भूमिका निबाही। अंग्रेजी दवाओं के साथ इनने भी प्रतिरक्षात्मक शक्ति विकसित करने में काफी मदद की।वस्तुतः यह इनकी भूमिका ही रही है कि भारत में संक्रमण दर और शीघ्र ठीक होने वाली दर इतनी बड़ी जनसंख्या वाले देश में तुलनात्मक दृष्टि से कम ही रही।यह मेरादृष्टिकोण है। संभव है, विश्वइसे किसी अन्य दृष्टि से देख रहा हो।

 संभव है , आधिकारिक रूप सेइस कालरूप विषाणु ने प्रकटतः डेढ़ लाख लोगों की जान ले ली है पर वास्तविकता शायद इससे बहुत अधिक हो।

खैर इसनेलॉक डाउन को जन्मदिया। अकस्मात लिए गये इस निर्णय ने अनेकानेक समस्याएँ उत्पन्न कर दीं ।मजदूरों की समस्या ने देश के हर व्यक्ति को झकझोर दिया। उसके दुष्परिणामों से देश अबतक पूरी तरह उबर नहीं सका है।उद्योग धन्धों के पहियों के  रुक जाने एवं बाजार के अत्यन्त मद्धिम हो जाने से देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा  गयी।

बच्चे घर में कैद हो गये। विद्यालय बंद हो गये।बच्चो की आपसी विद्यालयी गतिविधियाँ रुक गयीं। ऑनलाइन पढ़ाई से अवश्य ही कुछ बच्चे लाभान्वित हुए।मगर यह उनके सर्वांगीण विकास के उद्येश्य को पूर्ण करनें में असमर्थ रहा।ऑफिसेज घर में सिमट गये पर कर्मचारियों की नित्य छँटनी ने बेरोजगारी की भयंकर समस्या पैदा कर दी।सब परेशान। समाज का हर तबका परेशान।

      ये समस्यें कमोवेश पूरे विश्व की एक समान रहीं परिणामतः पूरे विश्व की चिंताओं की भावभूमि एक सी होगयीं।  मानव जाति पर आए इसएक संकट ने सबको करीब ला दिया। इसके समाधानस्वरूपवैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया शुरु हो गयी।यू के ,अमेरिका,जर्मनी के साथ कोरिया ,कनाडा,चीन भारतजैसे अन्यकई देशों ने शीघ्रातिशीघ्र एक शक्तिशाली वैक्सीन निर्माण की प्रक्रिया में जुट गये । कई वैक्सीन अंतिम परीक्षण के दौर से गुजर वैक्सीनेशन की प्रक्रिया में भीजुट गये हैं। यह एक बहुत आशाजनक स्थिति आ चुकी है।विश्व की आपसी सहयोगात्मक दृष्टि इस विकट रोग की एक सकारात्मक परिणति है।हर प्राकृतिक विपत्ति मानव जीवन और जीवन शैली में कुछ सकारात्मक परिवर्तन  भी लाती है। इतिहास गवाह है कि इन विपदाओं ने सभ्यताओको नष्ट कर नयी सभ्यताओं को जन्म भी दे दिया है। इस कोरोना ने भी हमारी पुरानी जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव लाए हैं। हम भीड़भाड़ से बचकर  अल्प व्ययी और पर्यावरण को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के पक्षधर हो उठे हैं।घर के सभी सदस्यों का साथ रहना आपसमें अधिक तालमेल बिठाने में सहायक हो रहा है । कभी कभी इसकी विपरीत स्थिति की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

      हाँ ,इस दौरान मानव की सृजन प्रक्रिया को बहुत बल मिला । लोगों ने हर क्षेत्र में अपनी कल्पनाओं को साकार रूप देने के अवसर भी ढूंढ़े। रचनाशीलता को बल मिला।लोगों ने समाजसेवा के अवसर भी ढूँढ़े।

कोरोना के अतिरिक्त  विश्व के कई भाग बाढ् भूकम्प और आग से भी परेशान रहे। हो सकता है कि ये सामान्य सी स्थितियाँ कोरोना के कारण भयग्रस्त मन को अधिक भयावह प्रतीत हो रही हों।

अपना भारतवर्ष कईअन्य सामाजिक राजनीतिक समस्याओं में भी उलझा रहा जो उसे  समय समय पर अशान्त करती रही हैं।वर्तमान कृषक आन्दोलन इसी तरह देश को अस्थिर और उसकी योजनाओंनिष्फल करने की चाल है। यू के के प्नधानमंत्री को इस बिना पर गणतंत्र दिवस पर भारत न आने देने की चाल भारतके संवैधानिक निर्णयों में विदेशी राज्यों के हस्तक्षेप द्वारा इसकी संप्रभुता को चोट पहुँचाने जैसा ही है।अब लगता है कि हम अपनी लड़ाइयाँ खुद नहीं लड़कर सदैव उसमे विदेशी हस्तक्षेप चाहते हैं।यह प्रवृति वर्ष के आरम्भ में सी ए ए कानून के विरोध के समय से उत्पन्नहुई ही लगता है। कश्मीरके के विद्रोही नेतागणधारा 370 के प्रवधान को हटाए जाने के विरोध में चीन की सहायता से उसकी पुनर्स्थापना चाहते हैं। यह देश के लिए अत्यंत  दुखद और अन्दरुऩी विश्वास का हनन करनेवाला है  विषय है।।  देश में शान्ति बनाए रखने के लिये इस प्रवृति से बचने की नितान्त आवश्यकता है।

पाश्चात्य कैलेंडर पर नये वर्ष की नयी तिथियाँ आ रही हैं।पर अभी पूरी तरह आश्वस्त होने का समय शायद नहीं आया। कोरोना ने अपने रूप रंग बदल कर पुनः तेजी से फैलना आरम्भ कर दिया है। इस नये ढंग के वायरस ने साउथ अफ्रिका और यू केऔर कुछ अन्य देशों मे अपनेपाँव पसारने आरम्भ कर दिये हैं। कहा नहीं जा सकता कि वर्तमान कोरोना से यह अधिक भयावह होगा या कम। वर्तमान वैक्सीन उसपर असरकारी हों गे अथवा नहीं।विश्व के देशों ने आवागमन से सर्वत्र नहीं फैलने देने के लिए सुरक्षात्मक उपाय करने शुरु कर दिये हैं। स्वास्थ विद हमें इसकी भयावहतापर विजय पा लेनेका विश्वास दिलाना चाहते हैं।हम आशा करते हैं कि विश्व समाज इसके प्रतिरक्षात्मक उपाय भी ढूँढ़ लेगा । हमारी सहनशीलता इसे भी झेल सकेगी।

कहते हैं, देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है । हम सभी क्षेत्रों में विकास की नयी ऊँचाइयों को छू रहे हैं।लोग आत्मनिर्भरता के सिद्धांतों के तहत स्वोजगार की ओर मुड़कर इस दिशा में सार्थक प्रयास कर रहे हैं।पर्यावरण के प्रति जागरुकता पहले अथिक हुई  है।

 विकास एक ऐसी प्रक्रिया है जो जागरुकताके पीछे पीछे चलती है। शिक्षा इसका सबसे बड़ा जरिया है। शिक्षण ऒर प्रशिक्षण के द्वारा  लोगों मे यी तकनीक के प्ति विश्वास पैदाकर देश को इक्कीसवी सदी के शीर्ष तक पहुँचाना आज के यवा मानस क ध्येय होना चाहिए।शिक्षा नयी नीतियों ने वर्तमान पीढी के सर्वांगीण विकास के रास्ते खोले हैं। सन् 2021 से हम नयी उम्मीदों की ओर बढ़ रहे हैं। कोरोना के हर बदलते रूप से मुक्त हो एक भयमुक्त स्वाभाविक और सामान्य जीवन जी सकने की उम्मीद हम सर्वप्रथस करते हैं।

 हमारा सामाजिक ताना बाना  ध्वस्त होने से बचा रहे, सर्वधर्म समभाव में हमारी अटूट आस्था हो , सामाजिक, राष्ट्रीय और राजनीति की कोई गतिविथि इसे  छिन्न भिन्न नहीं कर सके अपनायह आदर्श विचारों वाला देश सदा विश्वगुरु की भूमिका का निर्वाह करसबका मार्ग प्रदर्शित करते रहने को सदा संकल्पित रहे। विश्व नववर्ष  का नव सूर्य देश की आत्मा को जीवित रखते हुए इसे सदैव विका

सपथ पर अग्रसर करता रहे।नव वर्ष से हमारी सबसे बड़ी यही अपेक्षा है।—-

आशा सहाय

23-12-2020,

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