बारीश कि बूंदें

बारीश कि बूंदें

मनीषा गुप्ता ‘मिशा’

छ्त पर पड़ती बारिश की बूंदे आज  जैसे  फिर राज को अतीत कि तरफ़ खींच रही थी। एक एक बुदं राज के दिल पर नश्तर कि तरह चुभ रही थी । बरसो जिन बुदों से पीछा  छुड़ा कर वो भाग रहा था आज वक्त  ने फिर उसको उसी जगह आने को मजबुर कर दिया ।  बात आज़ से करीब छ; साल पहले की है एक फ़ोटो ग्राफर सुन्दर वादियों से बेहद लगाव उनकी सुन्दरता को अपने कैमरे में कैद  कर उन्हे लोगो तक पहुंचाना  चम्बा से कुछ दुरी पर एक गावं जहाँ कि नैसर्गिक  सौंदर्यता देखते ही बनती है। चारों ओर उंचे –उंचे पहाड़ जो बर्फ़ से ढ्के हुए कल कल बहती नदी ओर मनमोहक द्र्श्यो ने उसका मन मोह लिया कच्ची पगडंडियों मे भागता हुआ जा रहा था । तभी एक बकरीयो का झुडं उसका रास्ता रोक देता है , राज उनसे बचने के लिए एक तरफ़ हो जाता है , तभी उसकी नज़र दुर एक लड़की पर पड्ती है जो हाथ मे लकड़ी लिए बकरीयो को हाँक रही होती है  राज एक ट्क उसकी सुंदरता को निहारता रह जाता है जैसे  ही वो पास से गुजरती है उसका आर्कषण राज को उससे बात करने को मजबुर करता देता है राज  उससे उसका नाम पुछ्ता है पर लड़की जैसे उसने राज कि बात सुनी ही ना हो वो दुबार पुछ्ता है , वो इस बार बड़ी बड़ी आंखों  से उसे घुरती हुई आगे निकल जाती है , उसको जाते  हुए देख राज भी अपने गन्तव्य कि ओर रवाना हो जाता है , धीरे-धीरे रात का अन्धकार गहराने लगता है , तभी दुर उसे एक रोशनी सी दिखाई देती है ,  वो देखता हे वहाँ तम्बु लगे  है वो भी अपना डेरा वहीं लगा लेता है , ओर जो उसके पास होता है खा कर सो जाता है थका होने के कारण उसको गहरी नीदंआ जाती है । अचानक राज कि आखं खुलती है वो लड़की जिसे उसने देखा था अपने पास महसूस करता है कि सपने में उसने उसी लडकी को देखा। ऐसा राज के साथ पहली बार हुआ  है। तभी उसको कुछ शोर सा सुनाई देता है।वो बाहर निकलता है ,ओर उधर कि तरफ़ जाता है जहाँ से शोर आ रहा होता है । वो भीड़ को चीरता हुआ वहाँ पहुँचता है ,तो देखता है कि वो लड़की सिर को झुकाए खड़ी है ।ओर एक वृद्ध औरत  उसको डांट रही है ,राज किसी से पुछ्ता हे कि माजरा क्या है तो पता चलता है।कि लड़की कि बकरियों ने वृद्धा के तम्बु मे घुस कर उसके खाने का सामान खा लिया ,ओर वो नुकसान कि भरपाई माँग रही है,राज उस वृद्धा को समझाता है और पूरी  भरपाई करने को तैयार  हो जाता है। राज उस लड़की कि तरफ़ देखता है ,जो भरी हुई आखों से  राज का धन्यवाद कर रही  है ,राज कुछ बोले इससे पहले वो वहाँ से भाग जाती है ,राज फ़िर उसको आश्चर्य से जाते हुए  देखता रह जाता है।राज वहाँ पर रहने वालो के जीवन के बारे मे जानने के लिए आगे बढ्ता है तो वहाँ के कुछ लोगो से बातों के दौरान  पता चलता है कि वहाँ रहने वाले लोग हमेशा यहाँ नही रहते कुछ दिन उनका डेरा यहां और  बर्फ़ पड़ने पर यहाँ से दुसरी जगह चले जाते हैं  इन लोगो को गुर्जर जाती का माना जाता है ,बकरी और गाय पालन इनका पेशा है,दुध,दही,घी ,मख्खन बेच कर यह लोग अपना गुजर बसर करते है ,राज उन लोगो के बारे मे जानकारी हासिल करने के बाद उस लड़की के बारे मे जानकारी हासिल करने निकलता है,लोगो से पुछ्ता हुआ वो वहाँ पहुंच जाता है अब तक उसने मन ही मन एक निर्णय ले लिया होता है ,वो उसके घर वालो से उसका हाथ मांग कर अपने प्यार को जीवन भर पाना चाहता है , बारिश मे भीगता हुआ वह जैसे ही वहाँ पहुंचता है बारिश कि बूंदों से खेलती हुई वो लड़कि उसके दिल कि गहराई मे उतर जाती है, वो एक ट्क उसकि मासुमियत को निहारता है ओर उसके पास जाता है राज को देख वो सकपका जाती है ।वो उसके पिता के बारे मे उससे पुछ्ता है ,वो इशारे से बता कर वहाँ  से भाग जाती है  , राज उसके पिता से मिल अपना परिचए देता है ओर बिना घुमाए वो सीधे उसका हाथ मागं लेता है। पर जैसे  ही उसके पिता के शब्द उसके कानो मे पड़ते है ,उसको अपना पहला प्यार अधुरा होता मेहसुस होता है और  भारी कदमो से वो वहाँ से बाहर निकल आता है राज  की  आखों से आसुं निकलने लगते है जो बारिश कि बुन्दों मे मिल जाते है ।वो उस लड़की जिसका वो नाम तक नही जानता था उसे जी  भर के जी लेना चाहता था और  अपने दिल के कैमरे  में उसे कैद कर वहां  से चला जाता है । आज इतने सालो बाद फ़िर वही जगह ।राज़ को उसके अतित मे ले जाती है आज़ फ़िर वही बारिश ओर उन आसुओ का उस मे  खो जाना इतने सालो बाद फिर राज़ के दिल में एक आस जागती है ऐसे यहां दुबारा अचानक आना कहीं ऐसा तो नहीं यह वादियां मेरे प्यार की राजदार थी इन्होंने मेरे प्यार को मुकाम देने की ठानी हो और खुद ही अपनी बेवकूफी पर मुस्करा उठता है , पर यह क्या अचानक दुर से उसे एक जानी पहचानी आकृति अपनी तरफ आती हुई दिखाई देती है वो जैसे जैसे राज के करीब आती है राज का दिल बहुत तेज धड़कने लगता है , वो लड़की राज के पास आ कर रुकती है और राज को देख उसकी आंखों से पहली बार आंसू बह निकलते हैं और वो टूटे फूटे शब्दों में सिर्फ इतना ही कह पाती है एक बार मुझ से भी पूछ लेते बाबू तो शायद इतने बरस तुम्हारे उस इंतजार में ना बिताने होते की तुम फिर मिलोगे की नहीं और राज से लिपट फफक कर रो पड़ती है राज फिर उन बूंदों में भीग जाता है पर इस बार ये बूंदे बारिश की नहीं राज के उस प्यार की होती है जिनके लिए घिर घिर के उसके जज्बात बरसते थे ….

कविता और कहानी