भीड़ किसी की नहीं होती

आंदोलन की आड़ में क्या किया किसान ने
देश के दिल दिल्ली को बंधक बना दिया
ओ अन्न दाता ये तुम ने क्या किया?
क्या यही इनका देश के प्रति सम्मान है?
देश के संविधान पर्व के दिन इस तरह की गैर जिम्मेदाराना प्रदर्शन
भूल कर भीड़ का कोई तंत्र नही होता
तूने आज गणतंत्र को ये दिखा दिया
कहलाते हो अन्नदाता फिर क्यों तिरंगे का
अपमान किया राष्ट्रीय पर्व पर तूने
लाल किले की प्राचीर पर विद्रोह का
रूप दिखा दिया गणतंत्र के गौरव को
शर्म सार किया ना थी किसी को
किसान देश का ऐसा भी कर जाएगा
यह घिनोनी साज़िश अब इतिहास में होगी दर्ज
भारत का उठा हुआ सिर आज झुका दिया
देश राष्ट्र से बड़ा नहीं कोई
मैं , तुम , नेता ना किसान कोई ।

गैर जिम्मेदाराना प्रदर्शन क्या संदेश देता है?
बहुत से सवाल हैं ? जवाब दो
उत्तर कौन देगा???
ये कैसा आंदोलन ?
©®मंगला!

कविता और कहानी