माँ

माँ

सोनाली सिंघल

समुंदर की गहराई
माँ के आँचल की लंबाई
कभी नापने की कोशिश मत करना
जीवन बीत जाएगा
पर तू नही जीत पाएगा…




कल नहीं


बिना कुछ किए ये ज़िंदगी मिल सकती है
उसका फल नहीं
अपने आज को आज ही जी सकते हो
कल नहीं,
खुवाइशो को कम करो
चुनिंदा के लिए होसले बुलंद करो,
कदमो को ना डगमगाने दो
अपने सपनो को महक जाने दो,
कदम बड़ाओगे तो एक दिन पहुँच जाओगे
चाहे हो मंज़िल कहीं…….
विश्वास रखो स्‍वम् पर
दूसरो की हमदर्दी पर नहीं,…….
चोट भी खाओगे कई बार
पर चलते जाना लगातार,
हिम्मत मल्हम का काम करती है
ना मानो तो आज़मालो ज़िंदगी इस ही तरह सवर ती है,
क्युकि मक्सद ही इंसान को मंज़िल तक पहुँचता है
वरना घर तो रास्ते पर चलने वाला भी पहुँच जाता है ………….

कविता और कहानी