मिट्टी के दीये

मिट्टी के दीये

कुम्हार   बना   मिट्टी   से,मिट्टी   के   दीये   बनाये।

अपने   आप    से   अपने   आप   को   बनाने   के 

हुनर   से   ‘ नीर ‘   का   मन   अचंबित   हो  जाये।।

जोड़ तोड़ करता जीवन को,फिर जीवन कैसे चलाये।

ईर्ष्या – द्वेष के धागों पर क्यों चतुराई के मोती चढ़ाये।।

जगमगाते दीयो ने कभी ना किसी से समझौता किया।

अपनी  रौशनी  से  दूर-दूर  तक  खूब  उजाला किया।।

अपने  जीवन  को  तू   कुम्हार  के  मन  सा  बना।

अपने  कर्म  से  जग  में  सुंदर  दीयो  सा  जगमगा।।

नीरज त्यागी

कविता और कहानी