मेरी धर्म पत्नी

मेरी धर्म पत्नी

आओ आज मैं अपनी दिल की बात
बताता हूं।
जो मेरे दिल की मल्लिका है
उसकी कथा सुनाता हूं।
जो खुद की बीमारी में भी
ध्यान मेरा पूरा रखती है।
सेवा करते करते उसके माथे पर
शिकन ना दिखती है।
ना जाने किस मिट्टी की है
रब ने उसे बनाया है।
वह सुंदरता की मूरत है
साहस खुदा से पाया है।
मेरी नींद ना खुल पाती
वह सुबह जल्दी उठ जाती है।
शुक्रिया प्रभु का करती है
फिर कार्य में लग जाती है।
उसे भूख और प्यास का
ध्यान नहीं रहता है।
क्या चीज़ जरूरी है
ख्याल उसी का रहता है।
फिरकी की तरह घूमती है वो
कार्य निबटा जाती है।
उसके संबंधों में मधुरता
स्पष्ट दिखाई देती है
सीधा सादा वेश है उसका
कोई डिमांड ना सुनाई देती है
उसकी दी सुख की अनुभूति से
मन द्रवित सा होता है
मैं क्यों नहीं कर पाता इतना
पीड़ा का अनुभव होता है।
वो मेरी लक्ष्मीबाई है
यू पी से वो आईं है।
मुझे भी साहस बंधाती है
मुश्किल से टकराती है
स्वादिष्ट बनाती है हर व्यंजन
प्यार से परोस लाती है।
मेरे पास शब्द नहीं हैं
फिर भी बड़ाई करता जाता हूं
आओ आज मैं आपको अपनी दिल
की बात बताता हूं
जो मेरे दिल की मल्लिका है उसकी
कथा सुनाता हूं।
और बहुत से गुण हैं उसमें
कहां तक बखान करूं
दिल कहता है मैं सिर्फ उसका
सम्मान करूं सम्मान करूं।
उसकी हर अदा है कातिल
मैं मर मर जाता हूं।
आओ आज मैं आपको अपनी दिल की बात सुनाता हूं
जो मेरे दिल की मल्लिका है
उसकी कथा सुनाता हूं।
हीरेंद्र चौधरी
9818020432

कविता और कहानी