ये पब्लिक है, सब जानती है

ये पब्लिक है, सब जानती है

ये पब्लिक,ये जनता सब जानती है, जनता ही जनार्दन है,लोकतंत्र के
महापर्व में जनता जनार्दन की भूमिका सर्वोपरि होती
है। जनता जनार्दन ने भाजपा व कांग्रेस को उसकी औकात बता दी,पर दोनों पार्टियों के नेता हार के बावजूदअपनी अपनी डफली बजा रहे है,न जाने कैसे अभी से भूल
गए करारी हार का सदमा!नैतिकता व
शुचिता की बार बार दुहाई देने वाली भाजपा ,
दो बार लगातार जीरो का रिकॉर्ड बनाती कांग्रेस
हो,दोनों के नेता ही बदजुबानी,बड़बोलेपन से
बाज नहीं आ रहे।भाजपा के ओम प्रकाश शर्मा कह
रहे हैं कि केज़रीवाल आतंकी है व आतंकी ही रहेंगे।कैलाश विजयवर्गीय
तंज कसते हुए कहा रहे हैं कि हनुमान जी ने ही
जिताया तो स्कूलों व मदरसों में हनुमान चालीसा पढ़ना अनिवार्य कर दो।गिरिराज सिंह ने
पूरे देवबंद को आतंक की
गंगोत्री बताया,अस्सी प्रतिशत मुस्लिम देशभक्त नहीं हैऔर रहीसही कसर कांग्रेस के पी०एल० पुनिया ने गांधी जी के हत्यारे गोडसे की तुलना
मोदी से कर दी।

हार के बाद अमित शाह को अब यह कहना पड़ा कि गोली मारो व भारत
पाक मैच कहने से नुकसान ही हुआ। चलो अच्छी बात है,एहसास तो
हुआ देखना है आखिर कब तक!
क्या यह सम्भव है कि मुस्लिमों को बिल्कुल दरकिनार कर पूरे भारत में सत्ता की सवारी कर लो! भाजपा को मिली 303 सीटों में मुस्लिम भाई-बहनों का भी बहुत योगदान है, मोदी जी ऐसा
कहते थकते नहीं थे,और
आज चन्द भटके हुए,भृमित मुस्लिमों के कारण पूरी कौम को ही दोषी ठहराओगे क्या?
विश्व की सबसे बड़ी पार्टी
दिल्ली में दो बार सात साल पुरानी छोटी सी पार्टी के आगे चित्त हो गई, धराशायी हो गई तो
इसके लिये चिंतन मनन की जरुरत है न कि चुभने
वाले ज़हरीले बोलों की।

दिल्ली वासियों ने आम आदमी पार्टी को प्रचंड बहुमत से नवाज़ा तो हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज का बस मुफ्तखोरी की जीत कहना क्या दिल्ली के
लोगों का अपमान नहीं।
अपना घोषणापत्र तो उठा कर देखिये भाजपा जी,
चल रही मुफ्त योजनाओं के अतिरिक्त लड़कियों को साईकल, स्कूटी फ्री ,
दो रुपये किलो आटा,कन्या विवाह में दुगनी मदद यह सब क्या है? गर तुम्हारी सरकार बन जाती तो यह सब ठीक था?कितना गिर गया है,राजनीति का स्तर! हर कोई गोटी अपने
हिसाब से फिट करना चाहता है!
केजरीवाल की जीत कई
लोगों को जीत हज़म नहीं
हो पा रही है। वो अब पूर्ण परिपक्वता के साथ
सयंमित राजनीति कर रहे हैं, यह शानदार जीत उसी का नतीजा है।लोगों को कुछ काम धरातल पर होता दिखा तभी तो वोट दिया, विश्वास व्यक्त किया। प्रचंड जीत तो
महत्वाकांक्षा बढ़ाती ही
है। भाजपा 2 से 303 पर
तो कांग्रेस आज425 से 52पर,जनता के कमाल
को समझिये!न तो हमेशा हाथ लहरायेंगे न ही हमेशा कमल खिलेंगे?
राहुल गांधी व कुछ अन्य तो अभी तक अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर स्वयं
ही कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने में लगे हैं। सोनिया गांधी को राहुल को राजनीतिक प्ले स्कूल
में भेजने का ब्यान दे रहे कुछ भाजपाइयों को स्वयं
भी ऐसे प्ले स्कूल में जाने की जरूरत है, जिनके कारण पार्टी को दिन प्रतिदिन नुकसान ही हो
रहा है। अतीत से सबक
ले कर ही जंग जीती है
जनाब!शून्य को भरने के
लोगों का आना जाना लगा ही रहेगा।
“हाउड्डी मोदी” व”केम छो
ट्रम्प” जैसे कार्यक्रमों से
अंतर्राष्ट्रीय छवि बनाइये पर राष्ट्रीय छवि तो धूमिल
मत कीजिये।
आज पूरे देश में बेरोजगारी की हालत पिछले 45 वर्षों में सबसे
ज्यादा खराब है, बढ़ती
महंगाई पर अंकुश नहीं
लग रहा,आपराधिक गतिविधियों पर कोई लगाम नहीं। त्राहिमाम करती जनता कभी लम्बा
इंतज़ार नहीं करती। मौका मिलने पर अपना फैसला सुना देती है। ये
जनता,ये पब्लिक सब जानती है, जो इसकी भावनाओं को समझेगा
वही सिरमौर बना रह सकता है, यह वो देश है,
जहां कभी भी किसी के भी मोरमुकुट बंध सकता है।
-राजकुमार अरोड़ा’गाइड’
कवि,लेखक व स्वतंत्र पत्रकार
सेक्टर 2,बहादुरगढ़(हरियाणा)

कविता और कहानी