राजनीति:-एक व्यवसाय

राजनीति:-एक व्यवसाय

मांगते है अधरों पर मुस्कान रखकर वोट,

सीने में पलते इनके पर हजारों खोट।

चुनाव से पहले इनके वायदे रसीले होते है,

जीत जाने के बाद जनता को बस नीम,करेले मिलते है।

नम्रता की जगह अब उद्दण्डता नजर आती है,

जनता की सेवा अब इनसे कोसो दूर हो जाती है।

अच्छा व्यवसाय राजनीति को इन्होंने बनाया ,

कम लगाकर लागत पैसा खूब कमाया।

हर एक बस नेता बनना चाहता है,

इतिहास और भूगोल भी न देश का जानता है।

मैनें कई छुटभैयो को देखा हाँक अपनी फाकते ,

जनता के दुखों में ये कभी जरा भी न झांकते।

देखो दुर्दशा देश की इनको नहीं कुछ मतलब,

अपने पांच साल निकले ऐश में करते यही है सब।

      कमलेश कुमार विश्वकर्मा

       गाडरवारा

कविता और कहानी