संतान के  उज्ज्वल भविष्य के लिए,

संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए,

संतान के  उज्ज्वल भविष्य के लिए,

माता-पिता सदा ही चिंतित रहते हैं।

सुबह से शाम काम में व्यस्त रहकर,

उनके लिए ही कुछ अर्जित करते हैं।

अपनी जरूरत की वस्तुएं  कम कर,

उतने में निजी जिंदगी गुजार लेते हैं।

किंतु आम आदमी अपने बच्चों को,

अभाव का जीवन जीने नहीं देते हैं।

गरीब इंसान  भी अपनी  संतान को,

उच्च स्तर की शिक्षा देना चाहता है।

खुद गरीबी औरअभाव का दंश सह,

बच्चे को खुशहाल देखना चाहता है।

माता-पिता सिर्फ ऐसा कर सकते हैं,

जिनकी गोद पाने प्रभु भी तरसते हैं।

अंतिम सांस तक माँ-बाप बच्चों को,

स्वस्थ-सुखी रहने काआशीष देते हैं।

युग-युग से यही सनातनी परम्परा है,

बुजुर्गों ने बचपन से यही सिखाया है।

दिया दिव्य संदेश  जीवन में उतार लें,

जिसमें सुख,समृद्धि,शांति समाया है।

डॉक्टर सुधीर सिंह

कविता और कहानी