सहयोग

सहयोग

भावना तेज कदमो से चली जा रही थी उसे पता था कि निश्चय आज डांट मिलेगी । स्कूल से घर की दूरी को भावना ने तेज तेज चलते हुए पास बनाने की कोशिश की । पर फिर भी टाइम से नही पहुँच पायी । जब पहुँची तो प्रार्थना     हो चुकी थी । उसने जल्दी से अपनी क्लास पहुँचने की कोशिश की उससे पहले ही प्रिंसिपल की तेज आवाज ने उसके कदमो को रोक दिया पीछे पलट कर देखा प्रिंसिपल उसे गुस्से से देख रही थी । उन्होंने कहा मिसेज सक्सेना आज क्या बहाना हैं टाइम से न आने का भावना सक्सेना को कोई जवाब नही देते बना फिर उसने प्रिंसिपल को सॉरी बोला और फिर कभी देर नही होगी ऐसा बोली पर प्रिंसिपल ने साफ बोल दिया आज के बाद अगर उनको देर हुई तो वो उन्हें हटा देगी ।कह कर वो चली गयी भावना की आंखे तरल हो गयी वह धीरे कदमो से पढ़ाने चली गयी ।

घर लौट कर आई तो उसके चेहरे पर निराशा के भाव थे पति की साधारण कमाई में उनका गुजारा नही हो पाता था तभी भावना ने नॉकरी की पर घर और काम के बीच  सामंजस्य नही बैठ पा रहा था सुबह घर का पूरा काम करने की वजह से उसको देर हो जाती थी  उसकी सास विकलांग थी जिसकी वजह से कुछ खुद नही कर पाती थी तो भावना उनका दैनिक कार्य स्वयं करती थी और यही सब करते करते उसे देर हो जाती थी पति 9 बजे ऑटो चलाने चले जाते थे वो बहुत कहते कि मैं घर के काम मे मदद कर दूँ पर भावना कभी नही मानी उसको पता था कि उसकी सास बेटे को काम करते देख कर उसे ही बुरा भला बोलेगी वो जल्दी से नाश्ता और बच्चो को तैयार करके पहले स्कूल भेज देती लाख सुबह जल्दी उठने के बाद भी उसे रोज देर हो जाती। उसने सोच लिया कि कल से वो और जल्दी उठेगी फिर वह पढ़ाने लगी ।

छुट्टी के वक्त फिर से प्रिंसिपल ने उसे वार्निंग दी वह कल टाइम से आएगी बोल निकल गयी

एक साधरण फैमिली में शादी हुई उसकी पति ऑटो ड्राइवर थे उनकी कमाई में घर खर्च हो नही पाता तो मजबूरी में भावना भी करने लगी क्योकि माँ की दवा में बहुत पैसा लगता था कमाना भावना को बुरा नही लगता था पर रोज रोज की डांट से वह परेशान हो गयी रात में पति को बताते बताते वह रो पड़ी तो राहुल ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा कि वह नॉकरी छोड़ दे वह पार्ट टाइम जॉब कर लेगा पर भावना समझती थी कि राहुल ने ज्यादा काम किया तो तबियत खराब हो सकती हैं उनकी तब राहुल ने कहा पति पत्नी एक ही गाड़ी के दो डिब्बे की तरह होते है एक के बिना दूसरा नही चल पाता तो वह उसे माँ का दैनिक कार्य करने दे नही तो जॉब छोड़ दे भावना किसी भी तरह तैयार नही हो रही थी उसका मन नही मान रहा था कि राहुल घर के काम मे हाथ बटाये । तब राहुल ने कहा कि वो भी तो हाथ बटा रही हैं थोड़ा काम करने से घर का मैं बीमार नही हो जाऊंगा राहुल ने कहा समझो कि मेरा और तेरा कुछ नही बस दोनों के सहयोग की जरूरत है तब भावना मांन गयी पर दूसरे दिन राहुल के काम करने पर सासू माँ ने उसे बहुत डांटा की पति से काम कराती हो शर्म नही आती तुम्हे तभी राहुल आ गए उन्होंने आते हुए बात सुन ली औऱ भावना को रोते देखा तो आपा खो कर राहुल ने तेज आवाज में माँ से कहा ये क्या है माँ भावना कोई मशीन तो नही की काम करती रहे फिर वह भी तो घर खर्च उठा रही तो इसमे अगर मैंने बेटा हो कर घर का काम कर दिया तो क्या गलत किया जो भावना की ऐसे डांट रही आप उसकी परेशानी आप और मैं नही समझेंगे तो कौन समझेगा । तब बहुत समझाने पर माँ को अपनी गलती का आभास हुआ उन्होंने भावना से माफी मांगी तो वह रोते हुए उनके पैरों पर गिर पड़ी बोली आप बड़ी है माँ आपका हक हैं डांटने का प्लीज़ माफी मांग कर मुझे शर्मिंदा न करे दोनों सास बहू गले लग गयी उनकी माँ को समझ आ गया कि घर का काम अगर लड़का कर दे तो कुछ गलत नही क्योकि बहु भी तो बाहर काम करके उसका हाथ बटा रही हैं ।उन्होंने अपने समझदार बेटे और बहू को गले से लगा लिया।

                  आकांक्षा दिवेदी बिंदकी फतेहपुर

कविता और कहानी