सुबह

सुबह

सुप्रभात 
अलविदा करता रात को
खिले कमल और
सूरज की किरणों की लालिमा
लगती चुनर पहनी हो
फिजाओं ने गुलाबी
खिलते कमल लगते
तालाब के नीर ने
लगाई हो जैसे
पैरों में महावार
भोर का तारा
छुप गया उषा के आँचल
पंछी कलरव ,
माँ की मीठी पुकार
सच अब तो सुबह हो गई
श्रम के पांव चलने लगे
अपने निर्धारित लक्ष्य
और हर दिन की तरह
सूरज देता गया
धरा पर ऊर्जासंजय वर्मा “दृष्टि ‘125 शहीद भगत सिंग मार्गमनावर जिला -धार (म. प्र )Attachments areaReplyForward
कविता और कहानी