स्वान

स्वान

मित्रों “स्वान” (कुकुर या कुत्ता) के बारे में कौन नहीं जानता, उसे कौन नहीं पहचानता ? हम जहाँ भी रहते हैं, काम करते हैं वहाँ स्वान की उपस्थिति आम बात है। यों तो स्वान की गिनती जानवरों में की जाती है, इंसानों से परे । लेकिन इंसान में इंसान होते हुए इंसानियत, ईमानदारी, वफ़ादारी, मिले न मिले पर स्वान में….। स्वान के अन्दर वफाई व बेवफाई का भेदभाव नहीं होता, बल्कि अपने स्वभाव के अनुसार ही…। शायद वह सूंघने की शक्ति के कारण ही अच्छा और बुरा महसूस करता है । वफ़ा-जफ़ा का भेदभाव केवल मनुष्यों में ही पाया जाता है ।
हम जिस गली मोहल्ले, कालोनी या गांव में रहते हैं । वहां पर कुत्ते भी अवश्य होते हैं । कुकुर घर में भी पाले जाते हैं । क्योंकि कुत्ते होते ही इतने….। खैर, हमें कुत्तों को सम्मान के साथ पुकारना चाहिए । इसलिए उनके लिए कुत्ता शब्द का प्रयोग करना मुझे अच्छा नहीं लगता । हाँ, शायद कुछ लोगों को लगता हो । मुझे लगता है कि जैसे मैं किसी शरीफ और ईमानदार हस्ती को गाली दे रहा हूँ । इसलिए मैं उसके सम्मान में न कुत्ता लिखूंगा और न ही कुकुर । स्वान ही मुझे सम्मानजनक शब्द लगता है । इसलिए सभी लोग कुत्ते के सम्मान सूचक शब्द को पहचान लें, अच्छा लगेगा ।
हाँ, तो मैं बात कर रहा हूँ स्वान की । स्वान के स्वभाव को कौन नहीं जानता ? वह एक जिम्मेदार व वफ़ादार प्राणी होता है, ऐसा हम सभी कहते हैं । उसकी वफ़ादारी के किस्से अक्सर सुनने को मिलते हैं । वह जिस गली मोहल्ले, कालोनी अथवा गांव में रहता है, वहां का स्वयं को जिम्मेदार प्राणी समझता है । किसी चौकीदार की तरह उस क्षेत्र की निगरानी करता है । एक तरह से यों मानिए की रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य की तरह काम करता है । सभी जानते हैं कि स्वान की सूंघने की शक्ति बहुत अधिक होती है, जिससे वो अपने और पराए को समझ जाता है । सूंघने की शक्ति उसके बहुत ही काम आती है, जिसके कारण जो मानव नहीं कर पाता, वह स्वान कर दिखाता है ।
स्वान जहाँ भी रहता है । उसके मालिक प्रति पूर्ण समर्पित होता है। वो किसी का कर्ज़ अपने ऊपर नहीं रखता, चाहे वो प्यार का कर्ज़ हो, पालन पोषण का हो या फिर उसके ऊपर खाने पीने का । वो अपने ऊपर कुछ भी किसी का उधार नहीं रखता । अपने व पराए की पहचान उसे अच्छी तरह से होती है । जो पहचान मनुष्य करने में अक्षम होता है ।
उदाहरणतः आप किसी भी गली मोहल्ले में चले जाइये तो सर्वप्रथम स्वान ही आपका परिचय पूछेंगे । भोंक-भोंककर आपका दिमाग खराब कर देंगे और तब तक आपका पीछा नहीं छोड़ेंगे कि जब तक वहाँ रहने वाला आपका कोई परिचित न आ जाय । यहां यह पता चलता है कि स्वान की क्या महत्वता है ?
सर्वविदित है कि स्वान को लोग अपने घरों में भी पालते हैं अपनी हिफाज़त व सुविधा के लिए । चाहे कोई छोटे मकान में रहता और चाहे कोई बड़े मकान में, कोठी या बंगले में, सभी स्वान को बड़े ही प्यार से अपने घर के सदस्य या अपने बच्चे की तरह पालते हैं। उसके खाने-पीने व साफ सफाई का पूरा ध्यान रखते हैं । क्योंकि, उन्हें स्वान की वफ़ादारी व समर्पण पर पूरा भरोसा होता है । जो उनकी किसी न किसी रूप में सहायता करता है, उनके परिवार की जी जान से सुरक्षा करता है । जिसकी किसी इंसान से भी आशा नहीं की जा सकती । स्वान कई ऐसे काम भी करता है जिसकी व्याख्या करना मेरे लिए सम्भव नहीं है ।
स्वान का महत्व हमारे देश की फोर्स के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। जब किसी भी फोर्स में इंसानों के बसका का काम नहीं रहता तो स्वान ही उनके काम आता है । किसी भी गुमशुदा वस्तु या किसी चोर, क़ातिल अन्य किसी गुनाहगार अथवा अपराधी को विशेष रूप से पकड़ना हो तो उन्हें पकड़ने के लिए स्वान को ही याद किया जाता है । सभी जानते हैं कि स्वान की सूंघने की क्षमता बहुत अधिक होती है । स्वान अगर किसी भी व्यक्ति कि वस्तु को सूंघ ले तो वह उसी के आधार पर आगे बढ़ता रहता है और अपने गंतव्य अथवा अपराधी तक पहुँच जाता है, जिस कारण फोर्स व लोगों की दृष्टि में स्वान हीरो बन जाता है । इंसानों के मुकाबले स्वान महत्वपूर्ण हो जाता है और इंसानों से अधिक सम्मान पाता है।
अंततोगत्वा कहने का तात्पर्य यह है कि स्वान हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्राणी होता है। हमें उसके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए । स्वान हमारी सुरक्षा करता है, तो हमें भी उसकी परवाह करनी चाहिए । क्योंकि किसी भी प्राणी की सच्ची पहचान उसके गुणों के आधार पर होती है, और सच्चे गुण स्वान में अवश्य पाए जाते हैं, इंसान के मुक़ाबिल । इसलिए स्वान को कभी कुत्ता शब्द से नहीं पुकारें । सम्मान जनक शब्द से ही बुलाया जाय । क्योंकि स्वान को वफ़ा, बेवफ़ा का बोध न होते हुए भी कर्तव्यपरणता का परिचय देता है । अपने मालिक या अपने संरक्षकों का विशेष ध्यान रखता है । वफ़ादारी करता है । कई बार वफ़ादारी में अपने प्राण न्यौछावर भी दे देता है। इसलिए हमें….।
यह बात और है कि कई व्यंग्यकार स्वान पर अनेक प्रकार की बातें करके स्वान का स्तर अथवा कुछ इल्जाम लगाकर उसकी अनेक प्रकार से व्याख्या करते हैं । कभी आवारा कहकर, कभी भौंकने वाला व काटने वाला, गन्दा व अच्छा कुत्ता कहकर । क्योंकि शायद इससे उनकी रोजी-रोटी चलती है। कुछ भी हो, कैसा भी, किसी भी हाल में स्वान होता वफ़ादार ही होता है, वो मनुष्य की तरह रंग नहीं बदलता । बेवफाई नहीं करता, धोखा नहीं देता, चाहे पालतू हो अथवा घुमत्तू ।

सर्वाधिकार,
पवन शर्मा परमार्थी
कवि-लेखक

कविता और कहानी नई दिल्ली सभी रचनायें