हद कर दी आपने

हद कर दी आपने

“अरे स्वति सुन तेरे लिए बड़ा ही अच्छा लड़का ढूढ़ा है बिटिया हलवाई है हलवाई बड़ा अच्छा कमा लेता है, यह ले फोटो देख।” अम्मा ने बड़ी प्रसन्नता से स्वाति को यह खुशखबरी दी।

उत्सुकतावश फोटो को अम्मा से लेकर देखते ही गुस्से से लाल पीली होती स्वाति बोली “अम्मा यह तो बुढढा है कम से कम पचास साल का तो होगा यह, मैं नहीं करूंगी इससे शादी। तू मना कर देना।”

“अरे पगली बुढ्ढा है तो क्या हुआ, है तो बढ़िया, खूब कमाता है और इसकी माँ भी आजकल की ही मेहमान है। और तो और कुछ मांग भी नहीं रहा दहेज में।” अम्मा ने कहा।

“अम्मा तू चाहें दहेज वाला लड़का ढूढ ले लेकिन मैं इस बुढढ़े से शादी नहीं करूंगी।” स्वाति ने खरा जवाब दिया।

“ओहहो बड़ी आई दहेज वाला लड़का ढूढ लें कहने वाली दहेज क्या पेड़ पर उगता है? और तू कोई इकलौती थोड़ी ही है तेरे ऊपर तेरी बड़ी बहन भी हैं और एक भाई भी। सारा खर्चा तुझपर ही कर देंगे तो इनके ब्याह कैसे होंगे?” अम्मा मुँह बनाते हुए बोली।

स्वाति ने उत्तर दिया “अम्मा मैंने बचपन से ही झाडू पोंछा बर्तन का काम शुरू कर दिया था सारा लगा दे दहेज में लेकिन मैं किसी बुढ़ढ़े से शादी नहीं करूंगी।”

अम्मा बोली “तूने कमाया तो क्या खाया नही? बड़ी आई हिसाब बताने वाली महीने का खर्च देती है तो तेरे भी तो खर्चे है खाना, सोना, रहना, दवाई ये सब सुविधाएं भी तो मिलती है न तुझे।”

स्वाति ने क्रोधित स्वर में कहा “देख अम्मा तू इस बुढ़ढ़े से मना कर दे नहीं तो सिलेण्डर जला के आग लगा लूंगी खुद तो मरूंगी ही लेकिन ये घर भी नहीं बचेगा।”

अपने मकान की चिंता में अम्मा ने फटाफट पचास वर्षीय लड़के को मना करने के लिए फोन मिलाया। अम्मा के स्वाति के लिए मना करते है वह तपाक से बोला “अरे अम्माजी आपकी एक बेटी और भी तो है जो स्वाति से

पांच साल बड़ी है। मैंने सुना है घर का सारा काम वो ही करती है, स्वाति तो वैसे भी पूरा दिन बाहर काम पर ही रहती है उसे घर संभालने की क्या समझ होगी?

बड़ी बेटी का नाम आते ही अम्मा क्रोधित स्वर में बोली “जी नहीं आप तो उम्र में उससे बहुत बड़े हो उसके लिए तो उसके आसपास की उम्र का लड़का ही देखेंगे।”

इस बात पर पचास वर्षीय एलिजिबिल दूल्हा हंसते हुए बोला “वाह अम्मा हद कर दी आपने छोटी बेटी के लिए मेरी उम्र सही है पर बड़ी बेटी के लिए मैं बड़ा हूँ। वाह।”

इला सागर रस्तोगी

कविता और कहानी