* हरियाली का नया सवेरा *

* हरियाली का नया सवेरा *

                          – रवीन्द्र जुगरान

कृषक भूखा

सड़क पर सोया

अन्न दाता

क्यों है रोया,

सत्ता का

देख गलियारा

आरोपों के

जंजाल में खोया,

हाड़ कपाती

सरद रात

खुला आकाश

लगा है मेला

देखनें को

हरियाली का नया सवेरा।।

– रवीन्द्र जुगरान

कविता और कहानी