हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने

हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने

हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने और पूछती हूं आपसे एक सवाल

क्या यह अंत है या मचा हुआ है कोई और बवाल

क्या इंसान अपनी करनी पर पछताएगा

या बिना पश्चाताप किए ही मर जाएगा

क्या कुछ ऐसा है जिसे आप बता रहे हो

या फिर बिना कुछ कहे ही दुनिया को डरा रहे हो

मैं कैसे समझूं कि ये आपका ही कोई इशारा है

क्या हर एक नजारे के बाद एक और नजारा है

यदि है इंसान की गलती तो बताओ उसकी सजा क्या है

और यदि नहीं देनी है सजा तो बताओ आपकी रजा क्या है

माना हो गई है हमसे गलती और इसकी कोई सजा नहीं है

पर करती हूं आपसे विनती की अब कुछ बचा नहीं है

सही कर दो सब कुछ कि जो कुछ बचा है वह अभी संभल जाए

कि कहीं ऐसा ना हो कि यह दुनिया श्मशान में बदल जाए

                         Rakhi Bhardwaj

कविता और कहानी