कोरोना का कहर

कोरोना का कहर

कोरोना का कहर

कोरोना, कोरोना, कोरोना, कोरोना।

इस महामारी से हर्गिज डरो न।।

जरूरी हिदायत जो तुमको मिली है,

करो उसका पालन, रहो अपने घर में,

न छुओ किसी को, न निकलो तुम बाहर,

यही चेतना तुम जगाओ हर नर में।

रखो धैर्य-हिम्मत, न खुद का हो रोना।

कोरोना, कोरोना, कोरोना, कोरोना।।

इस संकट-घड़ी में सभी साथ हो लें,

अटल एकता से ये संकल्प ले लें,

बचो खुद, बचाओ जो बीमारजन हैं,

सदा-भाव-दृढ़ता से जयहिंद बोले।

मदद में कहीं से कमी कुछ भी हो ना।

कोरोना, कोरोना, कोरोना, कोरोना।।

यही राष्ट्र सेवा, यही मानव सेवा,

बचोगे अगर तुम तो कुल भी बचेगा,

नहीं गांव-कस्बा-मोहल्ला-गली में,

तवाही का आलम भयंकर मचेगा।

अतः तुम भी चेतो कभी हठ करो ना।

कोरोना, कोरोना, कोरोना, कोरोना।

हमारी, तुमारी, सभी के ही द्वारा,

जरूरी उठाए कदम से रूकेगा,

उठाकर नजर देखो, दुनिया के लोगो!

नहीं ऐसा कुछ भी, जो न ही झुकेगा,

झुकेगा, झुकेगा रूकेगा कोरोना।

इस महामारी से हर्गिज डरो ना।।

-डॉ- राहुल

वरिष्ठ साहित्यकार

नयी दिल्ली-(भारत)

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