मुख्य ग्रह की मजबूती : दूर करती है कुंडली के दोष

मुख्य ग्रह की मजबूती : दूर करती है कुंडली के दोष

मुख्य ग्रह का अर्थ है कुंडली में पहले भाव यानि लग्न का स्वामी. सरल शब्दों में कहे तो कुंडली के पहले भाव में यदि ३ अंक लिखा है तो यह मिथुन लग्न हुआ. इसका स्वामी यानि बुध इस लग्न के लिए मुख्य ग्रह कहलाएगा. मेष और वृश्चिक लग्न का मुख्य ग्रह मंगल, वृषभ और तुला के लिए शुक्र , मिथुन और  कन्या के लिए बुध , धनु और मीन के लिए गुरु और मकर और कुम्भ लग्न के लिए मुख्य ग्रह शनि होगा.

मुख्य ग्रह के स्वराशि में होने से , अपने मित्र की राशि में होने से , उच्च  राशि में होने से या केंद्र या त्रिकोण में होने और पाप ग्रहों की दृष्टि से दूर होने पर  इसे मजबूत माना जाता  है.

 मुख्य ग्रह के मजबूत होने से व्यक्ति में आत्मविश्वास  खूब रहता है, उसकी निर्णय क्षमता  अच्छी रहती है, वह अपने आप को सिद्ध  कर  सकता है और संकट में भी संतुलन  बनाए रख सकता है. मुख्य ग्रह की मजबूती भाग्य की अन्य कमियों को दूर करती है.

इसके विपरीत मुख्य ग्रह के अस्त या नीच  में होने से, पाप ग्रहों के साथ होने से ,शत्रु राशि में होने से या ३,६,८,१२ में होने से भाग्य में कमी आती है. व्यक्ति का आत्मविश्वास  हमेशा कम  रहता है, वह अपनी बात कह नहीं पाता, निर्णय क्षमता  नहीं होती और वह हर मोर्चे पर मार ही खाता है.

मुख्य  ग्रह को  मजबूत करने के लिए उस ग्रह से सम्बंधित दान करे, उस ग्रह की  वस्तुओं  का उपयोग करे, ग्रह के मन्त्रों का जाप करे और अपने इष्ट की आराधना करे.

विशेष : जब कुण्डली में मुख्य ग्रह कमजोर हो तो उसकी वस्तुओं का दान करे, मगर वे वस्तुएं किसी से दान में न ले. यदि यह ग्रह मजबूत हो तो उसकी वस्तुओं का दान न करे वरन दान स्वीकार करे.

क्या आपका बच्चा बेहद शैतान है ?                              

कहा जाता है कि बच्चे शैतानी नहीं करेंगे तो क्या बड़े करेंगे? मगर जब ये शैतानी सीमा पर करने लगती है और स्वयं को और दूसरों को नुकसान पहुँचाने लगती है तो माता-पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है। ऐसे में एक नजर बच्चे की कुंडली पर भी डालना चाहिए।

राहु : यदि कुंडली में राहु केंद्र में है, अशुभ ग्रहों की दृष्टि में है तो बच्चा शैतान होता है। यह शैतानी तोड़फोड़, फेंका-फेंकी तक जा सकती है।

ऐसे बच्चे हायपर एक्टिव होते हैं। अत: एक स्थान पर बैठ ही नहीं सकते। यदि राहु शुक्र के साथ युति बना रहा हो तो बच्चे छुप-छुपकर कारस्तानी करते हैं। झूठ भी बोलते हैं। ये बच्चे पैर घिसटकर चलते हैं।

उपाय :

1. सरस्वतीजी की आराधना करवाएँ।

2. अश्वगंध का टुकड़ा गले में पहनाएँ।

3. मसालेदार भोजन न दें।

4. सतत काउंसिलिंग करें।

मंगल : मंगल की अशुभ स्थिति बच्चे को उग्र बना देती है। ये बच्चे गुस्सा बहुत करते हैं। एकदम बिफर जाते हैं, हाथ में आई वस्तु फेंकना व मारपीट करना आम लक्षण है। इन बच्चों को बड़े होने पर रक्तचाप की शिकायत हो जाती है। ये बच्चे जल्दबाज होते हैं, चोट भी लगती रहती है।

उपाय :

1. हनुमान चालीसा का पाठ करवाएँ।

2. पीपल के जड़ में दूध डलवाएँ।

3. लाल मसूर नौ बार उतारकर (मंगलवार को) दान दें।

4. अच्छी पुस्तकें पढ़ने को दें।

बुध : बुध की‍ स्थिति खराब होने पर बच्चा वाचाल हो जाता है। बेवजह बड़बड़ाना, पलटकर जवाब देना, बदतमीजी करना सीखने लगता है। पढ़ाई में मन भी कम लगता है।

उपाय :

1.गणपति का दर्शन करवाएँ।

2. बुधवार को हरी वस्तु का दान करवाएँ।

3. गुरु के साथ समय बिताने को कहें।

4. घर का वातावरण शांत रखें।

विशेष : बच्चों की परवरिश में घर के वातावरण का भी असर पड़ता है अत: प्रयास करें कि बच्चा स्वस्थ, गरिमामय वातावरण में बड़ा हो, और माता-पिता उसके आदर्श बन सकें।

 भारती पंडित

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