लेखक का मन होता है कुरूक्षेत्र का मैदान , काव्य गीता’’ का हुआ लोकार्पण

लेखक का मन होता है कुरूक्षेत्र का मैदान , काव्य गीता’’ का हुआ लोकार्पण

गाडरवारा । विगत दिनों पी.एस. विश्वकर्मा द्वारा रचित काव्य कृति ‘‘काव्य गीता’’ का विमोचन समारोह चेतना मध्यप्रदेश एवं के तत्वाधान मे वरिष्ठ साहित्यकार कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की अध्यक्षता रोटरी क्लब के डिप्टी चेयरमेन मिनेन्द्र डागा के मुख्य आतिथ्य में महांत बालकदास के सारस्वत आतिथ्य, जयमोहन शर्मा के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित किया गया । कार्यक्रम के शुभारंभ अतिथियों द्वारा माॅ सरस्वती जी के चित्र पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ । बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई तदोपरांत मंचासीन अतिथियों का स्वागत फूलमाला से किया गया । उपस्थित श्रोताओं की करतल ध्वनि के बीच अनुराधा प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित कृति ‘‘काव्य गीता’’का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया ।  कृतिकार श्री विश्वकर्मा जी ने अपने सृजन के बारे में बताते हुए कहा कि गीता पर आधाारित यह कृति सहज और सरल भाषा में लिखने का प्रयास किया गया है । उन्होनं कहा कि गीता के श्लोक जिन भावों को अभिव्यक्त करते हैं काव्य पंक्तियों को उन भावों से जोड़ते हुए सहज बनाया गया है । चेतना संस्था की ओर से विजय नामदेव, पोषराज मेहरा, विवेक दीक्षित, सचिन नेमा, निहाल छीपा, तरूण सागर द्वारा कृतिकार का सम्मान शालश्रीफल एवं सम्मानपत्र देकर किया गया । इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष कुशलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि एक लेखक का मन कुरूक्षेत्र का मैदान ही होता है जहां विभिन्न विचारों का जन्म होता है और उनका द्वन्द भी होता है । इस द्वन्द से कृष्ण के द्वारा दिए गए गीता के उपदेश परिलक्षित होने लगते हैं । कृष्ण हमारे अन्तर्मन में ही हैं, हमें महसूस करना होगा । सृजन कठिन प्रक्रिया है पर सृजन का परिणाम सुखद अहसास कराता है । काव्य गीता का सृजन भी लेखक द्वारा अपनी सृजनशीलता का उच्च शिखरीय उपादान है । उन्होने श्री विश्वकर्माजी को बधाई देते हुए कहा कि निश्चित ही प्रथम और इस महत्वपूर्ण कृति का विमोचन होना ऐतिहासिक उपलब्धि है । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मिनेन्द्र डागा ने कहा कि कृष्ण ने कुरूक्षेत्र के मैदान में अर्जुन के माध्यम से कर्मयोग को समझाया है । संस्कृत में लिखी गई गीता पढ़ने में कठिन है इसलिये इसका सहज सरल भाषा में लिखा जाना अम पाठकों के लिये कल्याणकारी होगा । मिनेद्र ने अपने द्वारा रचित कविता प्रस्तुत की । महंत बालक दास जी ने कहा कि आम व्यक्ति कर्म के माध्यम से अपने मोक्ष के द्वार ,खोलता है, गीता कर्म का मार्ग बताती है । गीता को काव्य शौली में सृजित किया जाना अद्भुत है । काव्य गीता की समीक्षा करते हुए शास्त्री एन.पी द्विवेदी ने कहा कि गीता आम व्यक्ति की धार्मिक भावानाओं का प्रतिनिधित्व करती है भगवान कृष्ण ने गीता के माध्यम से जो ज्ञान दिया है वह आमजन के कल्याण करता है । कार्यक्रम के द्वितीय चरण में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें विवेक दीक्षित, सचिन नेमा, पोषराज मेहरा, आनंद विश्वकर्मा ने अपनी रचनाये प्रस्तुत की । कार्यक्रम का संचालन विजय नामदेव ने और आभार प्रदर्शन नगेन्द्र त्रिपाठी ने किया ।

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