“सामाजिक मैंटल ब्लाक्स से आज़ादी”

कविता मल्होत्रा

(क्रिएटिव डायरेक्टर एवं संरक्षिका – अनुराधा प्रकाशन)

 

Everyone on this earth came without companion

Adhere unconditional love and be the champion

कॉफ़ी होम में एक ग्रुप मीटिंग के सिलसिले में जाना हुआ और जीवन के ग्रँथ में एक अध्याय और जुड़ गया।मीटिंग के लिए तय समय से कुछ पहले पहुँचने की आदत ने हमेशा मुझे एक नया सबक़ दिया। इस बार का सबक़ आप सब से साझा करना चाहती हूँ।

अभी हमारे ग्रुप के सदस्यों के आने में कुछ समय बाक़ी था इसलिए मेरी नज़र सामने वाली टेबल पर बैठे अधेड़ उम्र के एक सज्जन पर पड़ गई जो थे तो अकेले मगर आर्डर दो कॉफ़ी का दे रहे थे, शायद इसी वजह से मेरी दिलचस्पी उनके स्वँय से सँवाद में बढ़ गई।

 

कॉफ़ी होम में कॉफ़ी ऑर्डर करते हुए अकेला व्यक्ति

सज्जन – दो कॉफ़ी लाना

बैरा – दूसरा कोई आना वाला है तो थोड़ी देर में ले आऊँ क्या ? वर्ना कॉफ़ी ठँडी हो जाएगी

सज्जन – दूसरा भी यहीं है तुम दो कॉफ़ी ले आओ

बैरा – ओ के सर

( दो कॉफ़ी रख जाता है लेकिन expression के साथ जैसे कि कॉफ़ी आर्डर करने वाला अकेला व्यक्ति पागल

हो )

( पहले कप से सिप करते हुए )

सज्जन – चल भाई अब रिटायरमेंट के बाद की सैकिंड इनिंग प्लान करते हैं

( दूसरे कप से सिप करते हुए )

सज्जन – तेरा दिमाग ठिकाने पर नहीं लगता भाई

सारी उम्र सँघर्ष करते और ज़िम्मेदारियाँ निभाते निकाल दी एक पल भी आराम नहीं किया

अब तो अपने काम को विराम दो

( पहले कप से सिप करते हुए )

सज्जन – नहीं भाई असली काम तो अब शुरू करना है

अब तक तो वो सामान इकट्ठा किया जो सँग नहीं जाने वाला

अब आगे के सफर की तैयारी करनी है

सुना है खुदा के घर खाली हाथ नहीं जाया करते

( दूसरे कप से सिप करते हुए )

सज्जन – तेरा भेजा तो ऑलरेडी फ्राई हो चुका है भाई मेरा मत कर

वैसे तू करने क्या वाला है

( पहले कप से सिप करते हुए )

सज्जन – भाई मैं आज तक गणित नहीं सीख पाया बस वही सीखना चाहता हूँ

( दूसरे कप से सिप करते हुए )

सज्जन – क्या कह रहा है तू भाई तू तो ख़ुद एक गणितज्ञ है

( पहले कप से सिप करते हुए )

सज्जन – जीवन का गणित बिल्कुल अलग है भाई, अब अपनी कामनाओं को घटाना सीखना है, दिल से दिल के रिश्तों का जोड़ सीखना है, अपनी आत्मा के सोए हुए निस्वार्थ प्रेम को गुणा करना सीखना है और अपनी कमाई हुई सारी पूँजी को भाग देकर बाँटना सीखना है।

( दूसरे कप से सिप करते हुए )

सज्जन – तू तो सच में सठिया गया है भाई जो अब तक कमाया सब यूँ ही गँवा देने की योजना बनाए बैठा है

( पहले कम से सिप करते हुए )

सज्जन – सेवा निवृत्ति मेरे लिए जीवन के एक नए अध्याय की शुरूआत है जिसका सफ़र मुझे स्वाध्याय से पूरा करना है इसलिए –

न किसी से कोई अपेक्षा न ही रखनी है कोई उम्मीद

निस्वार्थ प्रेम बाँट कर मनानी है अब मुझे हर पल ईद

( चल भाई कॉफ़ी ख़त्म हो गई फिर मिलेंगे एक नए अध्याय के साथ, अलविदा )

उनसे नज़र मिली तो मैं पूछे बिना न रह सकी कि क्या आपका कोई दोस्त नहीं है जो आप इस तरह अकेले ही वाद सँवाद कर रहे हैं, उनका जवाब मुझे निरुत्तर कर गया –

देखो बिटिया अकेले दुनिया में आए और अकेले ही जाना है

रिश्ते नाते दोस्त दुश्मन तो दिल बहलाने का झूठा बहाना है

मुक़द्दर का सिकँदर वही जिस का केवल ख़ुद से याराना है

जो सबक़ ज़िंदगी भी न समझा सके वो ख़ुद को समझाना है

 

मुझे हक्का बक्का छोड़ कर वो सज्जन चले गए।उनके जाने के बाद मेरे ग्रुप के सभी लोग आने लगे थे और मुझे अपनी इस गोष्ठी के लिए एक नया मुद्दा मिल गया था, जिसकी चमक खरे सोने की तरह मेरे पूरे वजूद पर बिखर गई थी।

सामाजिक मैंटल ब्लॉक्स से आजादी पाकर मेरा मन स्वच्छँद उड़ान का तिरँगा फहराने लगा था।

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