जनता से जो वादे किये थे उन्हें पूरा नहीं किया : मनमोहन
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जनता से जो वादे किये थे उन्हें पूरा नहीं किया : मनमोहन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 14 दिसम्बर को रामलीला मैदान पर कांग्रेस की ‘भारत बचाओ रैली’ को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह साल पहले देश…

देश में NRC का विचार नोटबंदी जैसा : प्रशांत किशोर
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देश में NRC का विचार नोटबंदी जैसा : प्रशांत किशोर

नई दिल्ली: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर अर्थात एनआरसी (NRC) के मामले  पर ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा,  'देशभर में एनआरसी का विचार नागरिकता की…

हम गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयासरत हैं : राष्ट्रपति
राजनीति समाचार

हम गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयासरत हैं : राष्ट्रपति

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने  राष्ट्रपति भवन में आयोजित केंद्रीय विश्वविद्यालयों के सम्मलेन में कहा कि भारत ने निरंतर विकास के लिए स्वयं को तैयार किया है। "हम गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयासरत हैं…

भारतीय साहित्य पर्यावरणीय चेतना से ओत-प्रोत है – अजिम्स मुहम्मद भारतीय साहित्य में पर्यावरण विमर्श पर कोडुंगल्लूर में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
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भारतीय साहित्य पर्यावरणीय चेतना से ओत-प्रोत है – अजिम्स मुहम्मद भारतीय साहित्य में पर्यावरण विमर्श पर कोडुंगल्लूर में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

पर्यावरण प्रदूषण या पर्यावरण में मानव के हस्तक्षेपों के कारण आजकल जो प्राकृतिक विपत्तियाँ दुनिया भर में हो रही हैं, इनसे हम सब वाकिफ़ हैं ।  पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का समय बीतता जा…

चीत्कार
कविता और कहानी

चीत्कार

निः शब्द हो जाती है अंतरात्मा भी उस पल  ख्वाबों को अपने सामने जब तिनका तिनका बिखरते देखती है । लेकिन खुद का एक यकीं हूं मै  जरूरत नहीं मुझे बेपरवाही की खुद में सुरूर…

नेता जी की जय-जयकार
कविता और कहानी

नेता जी की जय-जयकार

पुष्प रहे खूब पाँव पखार नेता जी की जय-जयकार ........       तुम हो श्रेष्ठ,सकल गुणवान       सेवा, श्रम, अर्पण पहचान       त्याग, तपश्चर्या की मूरत       और कहाँ कोई है सूरत       अद्भुत,अपरम्पार कहानी      …

खुद से खुद के सँवाद की लिपि को गढ़ा जाए
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खुद से खुद के सँवाद की लिपि को गढ़ा जाए

नववर्ष की ढेरों शुभकामनाओं के साथ एक नया प्रण लिखें समूची मानवता के उत्थान हेतु बिताया हर एक क्षण लिखें —- समय का महाकुँभ अपनी गति से निर्बाध चलता रहता है और हर साल अपने…

मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ गर्व करूँ, या खुद से ही डर जाऊँ मैं। डर के साये में मैं जीती, क्या खुद ही मर जाऊँ मैं।। बेटी हो जाए  घर में, उसे बोझ समझ के पाला है।…

ना दिख मजबूर
कविता और कहानी

ना दिख मजबूर

रूह की गर्त पर एक नकाब लपेटे हूँ। टूटे सपनो में अब भी आश समेटे हूँ।। दुखों  की  कड़कड़ाती   धूप  बहुत  है। खुशी की सर्द हवा की उम्मीद समेटे हूँ।। क्यूँ हुआ तू किनारे ,…

नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी
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नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी

नही है कोई रक्षक तेरा ऐ भारत की नारी। करनी होगी तुझ को खुद ही अब अपनी रखवारि। वन कालका या बन चंडी कौइ भी रूप अपना। हाथों मे हथिआर लेकर, तू दैत्य संहार कर…