श्रीचौरासिया ब्राह्मण समाज ने  राष्ट्रीय हित व समाज हित भागीदारी सुनिश्चित की |
Special Article

श्रीचौरासिया ब्राह्मण समाज ने राष्ट्रीय हित व समाज हित भागीदारी सुनिश्चित की |

अखिल भारतवर्षीय श्रीचौरासिया ब्राह्मण महासभा ने श्री चौरासिया ब्राह्मण समाज की भागीदारी राष्ट्र हित समाज हित मे सुनिश्चित 504000/- पांच लाख चार हजार रूपये की राशी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष तथा पी एम केयर्स फण्ड…

फ़क़ीर (कविता)
कविता और कहानी

फ़क़ीर (कविता)

श्वेत वसन दाढ़ी सफ़ेद खाली दिखते हाथ चेहरे पर हैं झुर्रियां दीखे मलिन सी गात काम क्रोध मोह लोभ से इसका क्या सरोकार ये तो एक फ़क़ीर है जग इसका परिवार पाकर चंद सिक्के ही…

कविता– “कोरोना”
कविता और कहानी

कविता– “कोरोना”

हिन्दू है न ये मुसलमान कोरोना, रक्तबीज राक्षस विषाणु कोरोना। जो ग्रास बने हैं उन्हें उपचार चाहिए, सबका इस व्याधि से बचाव चाहिये। साबुन से हाथ धुलें मास्क लगाएं, छींकें मुह ढ़क सामाजिक दूरी बनाये।…

कोरोना
कविता और कहानी

कोरोना

कोरोना ने आज करा दिया सबको ये एहसास। धन दौलत सब मिथ्या,ना रहेगा कुछ भी पास।। जीवन मे सब कर लो , अब प्रभु से ये अरदास। सबको रखना सुरक्षित,सबको अपनो के पास।। सबकुछ अब…

प्रधान मंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं
कविता और कहानी

प्रधान मंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं

Doctor Sudhir Singh प्रधानमंत्री जी की ललाट पर चिंता की रेखाएं,130करोड़ जनता की परेशानी बयां करती हैं,दूरदर्शी राष्ट्रनायक  चुनौतियों से घबराता नहीं,खतरों से खेल लेने की उनकीआदत हो गई है. दुनिया के लिए 'कोरोना'आज गंभीर…

नियति ने सर्वोत्तम कृति से कैसा अजब खेल खेला है समूची प्रकृति उठान पर और मानव भयातुर अकेला है
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नियति ने सर्वोत्तम कृति से कैसा अजब खेल खेला है समूची प्रकृति उठान पर और मानव भयातुर अकेला है

(Smt Kavita Malhotra)विकास के नाम पर समूचा विश्व जिस गति से आगे बढ़ रहा था, आज उसकी रफ़्तार थम सी गई है। न तो कोई कारण ही किसी की पकड़  में आ रहा है न…

गीत – मुझे न भुलाना
कविता और कहानी

गीत – मुझे न भुलाना

अगर छोड़कर चल दिए हम जमाना। मेरे दोस्तो तुम मुझे न भुलाना। अगर छोड़ दें साथ साँसे भी मेरा। कहाँ फिर रहे साथ मेरा और तेरा।। मेरे जीते जी साथ कुछ पल बिताना। मेरे दोस्तो…

हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने
कविता और कहानी

हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने

हे प्रभु बैठी हूं फिर से लिखने और पूछती हूं आपसे एक सवाल क्या यह अंत है या मचा हुआ है कोई और बवाल क्या इंसान अपनी करनी पर पछताएगा या बिना पश्चाताप किए ही…

डरना नही
कविता और कहानी

डरना नही

  मुसीबतें तो  आएगी   पर फिसलना तुम नहीं।   जिन्दगी तो ये सतायेगी   मगर तुम डरना  नहीं।  बड़े बड़े चले आते यहां  कष्टों केभी पहाड़ कभी।  दोस्ती को भुला कर के  साधते हैं…