चेहरा : नीरज त्यागी

चेहरा वो किस काम का,पढ़ लें हर कोई मन की बात।

ऊपर वाले से अरज,मुखोटा धोके का दे चेहरे के साथ ।।

 

चेहरा सबका सच ना बोलता,कैसे समझूँ चेहरे के जज्बात।

तिरछी हो चेहरे पर आँखे अगर,लगते है अनगिनत आघात।।

 

चेहरा बड़ा अजीब हैं,झूठे का झूठ छिपाए।

सच्चा बोले अगर सच भी ,चेहरे से लूट जाए।।

 

एक चेहरा बस माँ बाप का,सच्चा है मेरे यार।

बदल लो तुम कितना भी अपना चेहरा ,वो हर दम तेरे साथ ।।

Releated Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *