एक अर्से बाद

जयति जैन “नूतन”

फुरसत के पल निकाल कर
खुद से मिलने का जतन किया है
सभी को माफ करके
बोझ को दिल से हटाया है
आज
एक अर्से बाद मुस्कुराया है ।
रूठे थे जितने भी अपने
सभी को प्यार से मनाया है
झूठे वादे किए थे जिनसे
उन्हें सच का आइना दिखाया है
आज
एक अर्से बाद मुस्कुराया है ।
खुद को परेशानी क्या हुई
दूसरों की नींद को उड़ाया है
समझ नहीं सके जिन रिश्तों को
उन्हें अपनी परेशानी को समझाया है
आज
एक अर्से बाद मुस्कुराया है ।
ख्वाहिशें बड़ी रही हैं मेरी
खुद पर अभिमान जताया है
थक कर गिरा आज जमीं पर
सच का सवेरा आया है
आज
एक अर्से बाद मुस्कुराया है ।

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