वह एक इंसान है,

डॉक्टर सुधीर सिंह  (पूर्व प्राचार्य -भागलपुर यूनिवर्सिटी ) सम्मानित संरक्षक – अनुराधा प्रकाशन 

 

हर कोई  याद रखे, वह  एक  इंसान है,

इंसान की कोख में  पला एक इंसान है.

जिससे वह  डरता है, वह  भी इंसान है,

जिसको  डराता  है , वह  भी  इंसान है.

जिसको सम्मान देता, वह भी इंसान है,

जिससे  सम्मान लेता, वह भी इंसान है.

जिसको वह मारता है,वह भी इंसान है,

जिससे मार  खाता है, वह भी इंसान है.

जिसे सताता है, वह भी  एक  इंसान है,

जो उसे सताता है, महज एक इंसान है.

जिसको लूटता है वह भी एक इंसान है,

लूट  मचाने वाला भी  तो एक इंसान है.

घर-बाहर  हर  कुकर्म  करता इंसान  है,

उसका  भुक्तभोगी  भी  होता  इंसान है.

इंसान पर व्यंग्य  करता  कोई इंसान ही,

व्यंग्य को  सह  लेता  है कोई इंसान ही.

हत्या और  बलात्कार  करता  इंसान है,

जिसका  किया  जाता वह भी इंसान है.

शोषक  और  शोषित  दोनों  इंसान  ही,

एक-दूसरे  के  रिश्तेदार  भी  इंसान  ही.

इंसान  की  कमजोरी  इंसान  जनता है,

उसका फायदा भी इंसान ही  उठाता है.

इंसान के सामने झुकता कोई इंसान ही,

इंसान को झुकाता कोई  एक इंसान ही.

इंसान ही यहां एक इंसान का दुश्मन है,

कोई  इंसान  ही  इंसान  का  हमदम  है.

एक-एक इंसाान भगवान  की संतान है,

परमात्मा ने सबको दिया जीवनदान है.

फिर भेदभाव क्यों और अभिमान क्यों?

बन  जाता  है इंसान  फिर  हैवान क्यों?

 

 

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शक्तिशाली हिंदुस्तान.

 

 

राष्ट्र  है तब हम हैं,

वह नहीं तो कुछ नहीं.

राष्ट्रहित के बिना,

स्वहित महत्वहीन.

जागृति लाना है,

जनता को जगाना है.

हर हाथ को काम मिले,

गरीबी मिटाना है.

समावेशी विकास का,

घर-घर मूलमंत्र हो.

हर हाल में यहां,

स्वस्थ प्रजातंत्र हो.

न कोई शोषक रहे,

न कोई शासक रहे.

हो नहीं हकमारी,

जनतंत्र अमर रहे.

दुश्मन चाहे कोई हो,

उसे नहीं छोड़े हम.

सीमा की सुरक्षा में,

सदा मुस्तैद रहे हम.

जय जवान,जय किसान,

साथ-साथ जय विग्यान.

सबके सहयोग से ही,

शक्तिशाली हिंदुस्तान.

 

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