बेटियाँ तो बाबुल की रानियाँ हैं

अकस्मात् हुई सड़क दुर्घटना में , पिता का बिना कोई ख़बर दिए , उस सफर पर निकल जाना , जहाँ से कोई वापस नहीं लौटता , उन बेटियों के लिए कितना हृदयविदारक है, जिन्होंने अपने सर से पिता की छत्रछाया को खोया है।लेकिन उस पिता के लिए ये कितने गर्व की बात है कि उनकी बेटियों ने खुद को कमज़ोर नहीं पड़ने दिया और समाज के किसी भी साँसारिक सँबँध को अपने पिता के अग्निदान का हक़ न देकर स्वँय ये कृत्य करने का निर्णय लिया।

अपने पिता को खो कर, परिवार के लिए पिता स्वरूप ढाल बन जाना ,और समाज की रस्मों को बदल कर , खुद को पितृ ऋण से मुक्त करना , आसान काम नहीं लेकिन अपने जज्बात अपनी आँखों में छिपाए जिस बहादुरी से आज इन दो बेटियों ने अपने पिता को विदाई दी है, ये मँज़र देख कर मेरा सर श्रद्धा से उस माँ के कदमों में झुक गया जिन्होंने इन बेटियों को जन्म दिया। उस पिता की साँसारिक रिहाई का सफर इतनी बडी तालीम मुहैया करवा गया जिस ने समाज की पुरातनपँथी सोच को ठेंगा दिखा कर दो बेटियों के पिता का नाम हमेशा के लिए स्वर्ण अक्षरों में गढ़ दिया है जो रहती दुनिया तक अपनी इन प्यारी बेटियों की आँखों में प्यार बन कर महकता रहेगा।

विनम्र श्रृद्धाँजलि

💐🙏💐

दुनिया की कोई दौलत जिन्हें बचा ना पाई

बेटियों में पापा की छवि साक्षात उतर आई

 

बेटियों ने अग्निदान दे कर शपथ एक उठाई

बेटियाँ चूल्हे झोंकने को दुनिया में नहीं आईं

 

जिस्मानी रस्में तोड़ कर रूहानी करें कमाई

समानता का है अधिकार बहन हो या भाई

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