इंतजार
कविता और कहानी

इंतजार

आज भी इंतजार बाकी हैउनसे क़रार होना बाकी हैहसरत-ऐ-दिल निकल लो आकरअब भी फस़्ल-ऐ-बहार बाकी हैयह दिखावे के नाज नखरे हैंतेरी आँखों में प्यार बाकी हैडगमगाते क़दम है यूँ मेरेउस ऩजर का खुमार बाकी हैहर…

जवाबदेही
कविता और कहानी

जवाबदेही

किसी ने योग दियाकिसी ने लंगर किसी ने दिया देसीकिसी ने विदेशी🌹🌹कोई हत्या कर रहा हैकोई डाल रहा है डकैती इतने सारे प्रश्न हमारेमन को उलझा रहे हैं🌹🌹कुछ सवालो का जवाब है गौणव्यवस्था बिगड़ रहा…

फ़ेसबुक का संसार
कविता और कहानी

फ़ेसबुक का संसार

अर्चना भारद्वाज (दिल्ली) फ़ेसबुक का विचित्र संसारनित नए मनोरंजन व विचार अजब इसकी माया नगरी गज़ब का ये मायावी संसार जाने कहाँ से अनूठे ढंग से  कितने लोगों को यह दिखातावर्षों लापता रहें जो हमसेउनसे…

व्यंग्य लेख : वैक्सिनेशन के लिए यथार्थवाद !
Special Article नई दिल्ली सभी रचनायें साहित्य

व्यंग्य लेख : वैक्सिनेशन के लिए यथार्थवाद !

नेता क्रिकेटर और एक्टर ये तीनों देश के सबसे महत्वपूर्ण वेस्ट मटेरियल है जिन्हे शीघ्रातिशीघ्र निर्यात करने की जरूरत है । अभी हाल ही में आपने देखा होगा सोयाबीन फार्च्यून आयल का एक एड आता…

वक्त
कविता और कहानी

वक्त

कभी एक-सा नहीं होता कभी हमारा तो कभी तुम्हारा नहीं होता किसी की ख्वाहिश है ना अधूरी होती व्यक्ति खुद से ही खुद  ना हारा होता जमीन पर होते किसके कदम भला मुमकिन हर किसी…

ये सूरजमुखी
कविता और कहानी

ये सूरजमुखी

देख रहे हो न ये फूल सूरजमुखी का , दिन भर तलाशता है सूरज को बिना किसी शर्त के , कभी उदास भी नहीं दिखता , कहां से बटोर लाता है इतनी मुस्कराहट कि हंसने…

जय युवा शक्ति
कविता और कहानी

जय युवा शक्ति

हम युवा शक्ति को जगा रहें। दंभ,द्वेष,पाखंड,आलस को भगा रहें। स्तम्भ हैं ये राष्ट्र का नवचेतना का सागर हैं। ये रूप में हैं अनेक पर एकता में हैं एक। ये सफर के हैं पथिक सुनहरे।…

वैक्सीनमय होता भारत
Special Article

वैक्सीनमय होता भारत

राजनीतिक सफरनामा :   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव पूरा देश वैैक्सीनमय हो गया है । हमारे देश की ,खासियत ही यह है कि यहां जो होता है वह सारे देश के माहौल को त्यौहारनुमा बना देता है…

प्रकाश उत्सव मनाएँ
Special Article

प्रकाश उत्सव मनाएँ

कविता मल्होत्रा गुरू का अभिमान शिष्य बने इँसान मानव धर्म है मानवता का ही उत्थान गुरू हम सबको बेहतर मानव बनने के लिए प्रेरित करें, यही सच्ची शिष्यता का मान भी है और गुरू का…

” बहुत दिनों बाद कुछ हाइकू”
कविता और कहानी

” बहुत दिनों बाद कुछ हाइकू”

1 आज मैं रोया बहुत दिनों बाद भुला के उसे  2 बहुत रोका रुकते कहाँ आँसू बेईमान से । 3 खो बैठा सब सपने बुनने में पाने को कुछ 4 कुछ बचा क्या मरके अब…