सुशील शर्मा   भारत विभिन्न भाषाओं और बोलियों का एक गुलदस्ता (गुलिस्तान) है। हमारे पास हड़प्पा, मौर्य से मुगल और अंग्रेजों की महान सभ्यताओं की धरोहर है।  । यदि हम भारतीय संस्कृति को करीब से देखें , तो हमें ग्रीक (यूनानी), फारसी, हरप्पन, अरबी, मंगोलियन, प्री-वैदिक, आर्यन द्रविड़ और नवीनतम […]

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शालू मिश्रा, नोहर(हनुमानगढ) राजस्थान   मन ये तेरा परेशान क्यूँ है, इस जग से बेफिक्र क्यूँ है, नित नये ख्वाब सजा कर मन में दबा बैठा क्यूँ है। पथ पर नित आगे बढ चल न चंद कांटो से तू डर, मुसीबतों को चीर तू देख, बिन अंधकार चमकता सितारा भी […]

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रवीन्द्र जुगराण   हिंदी की बिंदी से देश को, आओ हम शोभित करें। भारत की है ये प्यारी भाषा, आओ हम घोषित करें।।1 हम रहें देश या नगर ग्राम में, या रहें परदेश में। बोल चाल की भाषा में हिंदी, आओ हम पोषित करें।।2 तुम नेता, अभिनेता, पत्रकार, या हो […]

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पूनम द्विवेदी   गणेश जी तुमको मेरा पहला प्रणाम, चतुर्थी को आकर मेरा किया बेड़ापार। तुमको सुमिरन कर करते हम शुभ काम, माता गौरी शंकर के तुम लाडले लाल।     सभी शुभमुहूर्त में सभी लेते तुम्हारा नाम, विवाह मुंडन पूजा अर्चना करते लेकर तुम्हारा नाम। हवन यज्ञ आदि में […]

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(नीरज त्यागी*)   आग की लपटों के नीचे एक राख सी है। बर्फ पिघल रही है मगर एक भाप सी हैं।।   यूं तो रोशनी हर तरफ उजाला फैलाती हैं । लेकिन लोगो के खुले जख्मो को दिखाती है।।   माना ये अंधेरा एक सन्नाटा सा लपेटे है। पर ना […]

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  परम सत्य सत्य आज खामोश है, उदास है निराश है खो बैठा विश्वास है, मैंने पूछा क्यों- सत्य बोला – आजकल मेरी सुनता ही कौन है. मैं दर दर भटक रहा हूँ सच्चे को तलाश रहा हूँ जहाँ भी जाता हूँ झूठ का बोलबाला है सच का मुंह काला […]

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                       लघुकथा ‘स्टेटस सिंबल’ बीरम उसके गाँव से कुछ दूर के शहर में एक बंगले पर दिन रात की चौकीदारी का काम करता था . माँ का जिद भरा संदेशा आया था कि ज़्यादा न सही लेकिन चार दिन वास्ते तो आ ! इसलिए बीरम चार दिन की छुट्टी लेकर […]

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  उस बीहड़ जंगल में एक ऊंचा विशालकाय पत्थर न जाने कब से ज्यों का त्यों खड़ा था । आंधी तूफान , झंझावात और मुसलधार बारिश में भी एक इंच हिला नहीं था वो पत्थर . शाम के गहराते ही कुछ परिंदे उस पत्थर पर बैठकर बतियाते , गपियाते थे. […]

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अहम् उस दिन सेठ जी के बगीचे की ज़मीन के भीतर कुछ गहमा- गहमी , कुछ  उथल –पुथल  मची हुई थी . बगीचे के किसी एक  पौधे की जड़ बहुत क्षुब्ध थी. अपनी अन्य सखी – जड़ों को संबोधित करते हुए बोली “ तुम सब जरा सोच कर बताओ , […]

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(शालू मिश्रा) मुसीबत के समंदर में जो किनारा दे वो है मेरी माँ, जीने के मायने जो सिखाये वो हैं मेरी माँ। औलाद उदास हो तो मुस्कान चेहरे पर लादे वो हैं मेरी माँ। लबों पे जिसके कभी बद्दुआ न आती वो हैं मेरी माँ। हवाओं जैसी चलती हैं मेरी […]

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(‘जिंदगी एक सफरनामा’, ‘Life a journey’ व हिंदी इंग्लिश संयुक्त संस्करण ) अनुराधा प्रकाशन के ताज़ पर एक और हीरा गढ़ा गया, परिवार में और सदस्यों का आगमन हुआ और महफिल में चार चाँद लग गए। दुबई से आए लेखक डॉ सँजीव दीक्षित जी की नवीन कृति “ज़िंदगी एक सफ़रनामा” […]

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अनुराधा प्रकाशन का गौरव बढ़ाती साहित्य सृजन की कड़ी में,इस बार, एक ऐसी शख़्सियत को,साक्षात्कार के ज़रिए पाठकों से रूबरू करवाया जा रहा है, जिन्होंने आदरणीय गुलज़ार साहब को अपना गुरू माना है। क्रियात्मक लेखन एवँ ललित कला के क्षेत्र में पैंतीस वर्षों से पूरी तन्मयता से सँलग्न,मानव सँसाधन के […]

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अनुराधा प्रकाशन में ,साहित्य जगत के मुकुट का ,एक और नगीना ,हमारी सम्मानित सँरक्षिका श्रीमति सोनाली सिंघल जी। हम अपने पाठकों को सोनाली जी के साक्षात्कार के जरिए उन से रूबरू करवा रहे हैं।यूँ तो सोनाली जी अनुराधा प्रकाशन से काफ़ी समय से जुड़ी हुई हैं लेकिन अब वह एक […]

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नीरज के  गीतों  में दर्द है और टीस है, जीवन का सौंदर्य है,जो शांत,गंभीर है. खुशी हो  या गम ; विरह हो या मिलन, नीरज का मधुर गीत  सबों का मीत है. वे अब  रहे नहीं ; कीर्तिगाथा  है अमर, उन्हें याद  करने  का  गीत ही संबल है. क्ष्रद्धांजलि अर्पित […]

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जन्म 4 जनवरी 1925 को उ.प्र.के इटावा जिला के पुरावरी गांव में हुआ था। इनका बचपन काफी मुफलिसी में बिता । शुरु में गंगा मैयामें चढ़ाये जाने वाले 5 या 10 पैसे को नदी से एकत्र कर जीवन यापन होता था। इस मुफलिसी ने उन्हें गीतकार बना दिया। धीरे धीरे […]

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नई दिल्ली। जय भोजपुरी जय भोजपुरिया परिवार के द्वारा भोजपुरी के शेक्सपियर केनाव से ख्यातिप्राप्त भिखारी ठाकुर के पुण्यतिथी पर 15 जुलाई, 2018 के गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान के सभागार में राष्ट्रीय भोजपुरी कवि सम्मेलन काआयोजन किया गया । लव कुमार सिंह का मंच संचालन काबिले तारीफ था । दीप प्रज्वलन करकार्यक्रम का शुभारम्भ […]

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रिमझिम सावन में भी हर मन ज़हन प्रेम का भूखा क्यूँ परमपिता का अँश मधुशाला में रहकर भी सूखा क्यूँ   हमारी सोने की चिड़िया को न जाने जँग कैसे लगता जा रहा है। प्रगतिशील देश में नन्ही नन्ही गौरैया अपने ही नीड़ में असुरक्षित, सहमी-सहमी सी जीवनयापन को मजबूर […]

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(मनमोहन शर्मा ‘शरण’) कल 16 जून को पूरे देश में ईद मनाई जाएगी । सभी पार्टियों में इफ्तार पार्टी (आपसी मेल जोल और परस्पर सौहार्द की भावना के साथ) के  आयोजन का दौर शुरू हो गया था । काँग्रेस, बिहार में आर.जे.डी. तथा अन्य सभी लोगों ने अपने–अपने तरीके से […]

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बरसों से ख़ुद की खोज में हूँ और वो समझ रहे हैं कि, मौज में हूँ।   गुम हूँ शहरों की गुमनाम गलियों में, कभी नहीं समाप्त होने वाली भूल-भूलभुलैया में, सुनाई तो देती हैं बहुत-सी, अनुगूँजें यहाँ पर, पर दिखाई जो नहीं देता कोई सुकून यहाँ पर।   जब […]

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आशा सहाय इधर कुछ दिनों से,पता नहीं क्यों पर आबो हवा में एक सनक भरी हलचल व्याप्त है।सनक सदैवखतरनाक होती है।उसका आधार तर्क नहीं बल्कि मन का कोई दुराग्रह होता है,जो असंयमित होता है।स्वतंत्रता प्राप्ति के इतने वर्ष बीत गए हैप्रकृति ने अपने संतुलि त असतुलित रूप केजाने कितने दृश्य […]

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