डॉक्टर सुधीर सिंह मन की उद्विग्नता  को स्वयं ही मिटायें, दूसरों  के  आँगन में  आग नहीं लगायें ईर्ष्या, क्रोध,अहंकार धधकती आग है; इंसान का मन ही जिसका मूलाधार है. चित्त जिसका  शांत  है  और  संतुष्ट है, उसका  ही  जीवन आनंद से भरपूर है. सबके अंत:करण मेंआनंद का स्रोत है, यह […]

Continus reading  

रवि एक बहुत ही समझदार व्यक्ति है और 40 वर्ष की उम्र के इस पड़ाव पर काफी परिपक्व भी नजर आता है।एक बहुत ही व्यस्त सड़क पर अपनी धुन में रवि अपनी मंजिल की तरफ बढ़ा जा रहा था हमेशा की तरह उसकी कार की स्पीड वही 60-70 के बीच […]

Continus reading  

डॉक्टर कविता मल्होत्रा कोई तो जग को अनासक्ति का सबक सिखाए चार दिन का है जग मेला, सब मिथ्या मोह माय बचपन में खिलौनों के लिए मचल जाना, युवावस्था में मित्र मँडली का याराना, प्रौढ़ावस्था में गृहस्थाश्रम के दायित्वों का बहाना और वृद्धावस्था में तलाशना मँदिर, मस्जिद, गिरजे और गुरुद्वारे […]

Continus reading  

आती  हुई  हवाओं को, तुम निर्बाध बहने दो। कुछ  सवालों  को, बस  सवाल  ही रहने दो।।   इतनी  भी  दूरियाँ,  अपने  दरमियाँ  मत रहने दो। बैठो मेरे पास कुछ पल, कुछ हमें भी तो कहने दो।।   दोस्तों,  जमीं  को  जमीं और आसमाँ को आसमाँ रहने दो। बाँटों न आदम […]

Continus reading  

डॉक्टर मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं µ चुनाव, चयन प्रक्रिया चालू है । अपने भविष्य को लेकर बड़े–बड़े, लुभावने, सुनहरे वादों को सच मानकर, अपना हितैषी जानकर जनता अपना नेता चुनती है । उसे अपना सिरमौर बनाती है । मुश्किल तब महसूस […]

Continus reading  

(बुशरा रज़ा) बङा कनफ्यूज़न है भाई बङा कनफ्यूज़न है—!! कल शाम साढे पाँच बजे जब घर से निकली–, अपने नग़्मो के साथ गाती हुई अपनी धुन में –, ज़रा ज़रा सा जाम था उसी वक़्त मेरी नज़र कुछ दूरी पर सङक के किनारे खङी एक महिला पर पङी हर गाङी […]

Continus reading  

भारतीय प्राकृतिक चिकित्सक संघ द्वारा पहले “कृतिक चिकित्सा दिवस “ का आयोजन हिंदी भवन नई दिल्ली में किया गया , जिसमे कार्यक्रम कि अध्यक्षता इनपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ श्याम नारायण पाण्डेय ने की अतिथियों के रूप में डॉ संजीब पट्जोशी (आई पी एस – संयुक्त सचिव भारत सरकार ) […]

Continus reading  

“है रब की इबादत ग़ज़ल मेरी यारो, खुदा-ए-मुहब्बत ग़ज़ल मेरी यारो” एम०के० साहित्य अकादमी पंचकूला’ एवं ‘हरियाणा उर्दू अकादमी पंचकुला’ के संयुक्त तत्वावधान में भव्य सम्मान समारोह एवं कविसम्मेलन व मुशायरे  का आयोजन मुख्य अतिथि श्री राजबीर देसवाल आइ.पी.एस. ( Retd) एडवोकेट तथा विशेष अथिति डॉ०हेमन्त शर्मा , व  डॉ. […]

Continus reading  

उसकी अच्छी मुस्कान और खूबसूरत आँखें किसी साज़िश से कम नहीं हैं वह एक खुशमिजाज ख़्वाब है उसकी क्लासिक और प्यारी बातें समुद्र तट पर बिताई किसी रात और किसी लंबी रोमांटिक सैर की तरह हैं उसकी तरह उसकी बातें भी भुलाए जाने जैसी चीजें नहीं हैं अच्छी शराब और […]

Continus reading  

भारत दुनिया का सबसे बड़ा गणतन्त्र है जिसमें सवा अरब से अधिक आबादी निवास करती है। एक हिम शैल, तीन सागर, छ: ऋतुएँ, तीन दर्जन राज्य, दर्जनों धर्म/ पंथ, सैकड़ों भाषायें, हजारों बोलियाँ, साठ डिग्री सेल्सियस के रेंज में तापमान, हजारों त्यौहार, संस्कृति, रहन- सहन तथा मरुस्थल व मेघालय यहाँ […]

Continus reading  

(अशोक मिज़ाज) नज़रों के सामने था मगर ढूँढते रहे अपनी गली में अपना ही घर ढूँढते रहे। चेहरे पे ग़म के ज़ेरो-जबर ढूंढते रहे, वो दर्द किस तरफ़ था,किधर ढूंढते रहे। मौक़ा परस्त हम से भी आगे निकल गये हम अपनी कोशिशों में कसर ढूँढते रहे उसके लिए तो हमने […]

Continus reading  

जयति जैन “नूतन” फुरसत के पल निकाल कर खुद से मिलने का जतन किया है सभी को माफ करके बोझ को दिल से हटाया है आज एक अर्से बाद मुस्कुराया है । रूठे थे जितने भी अपने सभी को प्यार से मनाया है झूठे वादे किए थे जिनसे उन्हें सच […]

Continus reading  

(डॉक्टर सुधीर सिंह) गौर से देखने पर अनुभव किया, जमाने का रंग ही बदला हुआ है. जिसकेअधरों पर अभी हँसी थी, झूठ बोलने  पर स्याह हो गया है. रंग बदलने  में आदमी है  माहिर, उसके सामने गिरगिट शर्मिंदा है. सबने स्वीकारा है  इस सत्य को, मृत आदमी  बहुत  यहां जिंदा […]

Continus reading  

(आशा सहाय) आदिम जीवन- दशाओं से निकलकर आधुनिक जीवन-दशाओं मे प्रवेश करने की कला ही सभ्यता है।सभ्यता के चरण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और समस्त जीवन- दशाओं पर छा जाते है।पर क्या सभ्य मानव और सभ्यता के मध्य कोई विसंगति तो उत्पन्न नहीं होती? कया आधुनिक सभ्यता ही सभ्य मानव की […]

Continus reading  

भारतीयता के वास्तविक दर्शन अनेकता में एकता त्यौहारों में होते हैं, जब सभी मिलकर दीवाली, छठपूजा, भैयादूज, प्रकाशउत्सव, ईद आदि मनाते हैं । एक दूसरे को बधाई देते हैं । राजनैतिक पटल पर दिन–प्रतिदिन नए–नए वाद–विवाद देखने–सुनने को मिल जाते हैं । व्यक्ति अपने दृष्टिकोण से एक बात को सही […]

Continus reading  

(डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी) रोज़ की तरह ही वह बूढा व्यक्ति किताबों की दुकान पर आया, आज के सारे समाचार पत्र खरीदे और वहीँ बाहर बैठ कर उन्हें एक-एक कर पढने लगा, हर समाचार पत्र को पांच-छः मिनट देखता फिर निराशा से रख देता। आज दुकानदार के बेटे से रहा […]

Continus reading  

: डॉक्टर सरला सिंह राखी नाम की एक दुबली-पतली बीमार -सी ,साँवले रंग की एक लड़की,उम्र यही तेरह-चौदह की साल रही होगी । वह आठवीं कक्षा में पढ़ती थी । राखी कक्षा में बिलकुल पीछे बैठती थी। वह हमेशा चुपचाप बैठी रहती शायद इसी लिए उसकी कोई  सहेली भी नहीं […]

Continus reading  

विदेशी उच्च उपाधियाँ जीवन में बदलाव कहाँ लाती हैं ये तो अपने स्वामी को अहँकार की सीढ़ी पर चढ़ाती हैं विरला ऐसा जीव जगत में जिसे निस्वार्थ प्रेम पढ़ाती हैं   जिस तरह सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी तरह जीवन जीने की कला के भी दो पहलू होते […]

Continus reading  

मैं गंगा हूँ, मुझमें, किसी ने तन धोया। किसी ने मन धोया। गरीब-अमीर, पुण्य-पाप का कभी अंतर नहीं किया।   हँसते-हँसते, चुपके से ले लिया, जिसने जो कुछ दिया।   ले जा कर सौंप दिया, समंदर को, जिसने जो कुछ दिया। अब तुम जानो और समंदर जाने। विचार करो और […]

Continus reading  

सामाजिक समस्याओं को साहित्य के माध्यम से दूर किया जा सकता है । अकादमी की यह योजना है कि महापुरुषों और साहित्यकारों के जयंती के माध्यम से साधारण जन के मध्य साहित्य को पहुँचाया जाए ताकि एक स्वस्थ और संस्कारयुक्त समाज के निर्माण किया जा सकें । यह विचार हिन्दी […]

Continus reading