घोषणा की पकौड़ियां

एक मंत्री थे
पाँच साल कुर्सी पर रहे
सभी अच्छे से जानते थे
उसने केवल अपने स्वार्थ साधे हैं

पाँच साल बाद
फिर चुनाव पर्व आया
मंत्री जी को फिर से
जनता के हितों की चिंता
सताने लगी, उसने तत्काल
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई
और घोषणाओं की झड़ी लगा दी

उसी शाम टीवी पर एंकर और एक्सपर्ट
मंत्री जी की घोषणाओं की पकौड़ियां
तलने में लगे गए
कभी-कभी आंच तेज़ हीने पर
जलने का खतरा बनता दिखता
पर पकौड़ियां तलने वाले
बहुत ही पहुँचे हुए थे
मंत्री पर जनता को लूटने के
आरोप तय नहीं थे
उन्हें अपनी सफाई में
बहुत कुछ कहने का
पूरा-पूरा मौका दिया गया
आखिर मंत्री जी ने
पकौड़ियां तलने पर
इतना खर्च जो किया था
पकौड़ियां तलने के लिए
एक्सपर्ट भी बुलाए गए थे

अगले दिन सारे नामचीन अख़बार भी
पकौड़ियां की महक से महक रहे थे
साथ में मंत्री जी के पकौड़े जैसे मुँह से भी
अख़बार सने हुए थे
लग रहा था कि, मंत्री जी ने
अगले पाँच साल के लिए
फिर से कढ़ाई चढ़ा दी थी….?

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