भारतीयता के वास्तविक दर्शन अनेकता में एकता : डॉक्टर मनमोहन शर्मा ‘शरण’

भारतीयता के वास्तविक दर्शन अनेकता में एकता त्यौहारों में होते हैं, जब सभी मिलकर दीवाली, छठपूजा, भैयादूज, प्रकाशउत्सव, ईद आदि मनाते हैं । एक दूसरे को बधाई देते हैं ।

राजनैतिक पटल पर दिन–प्रतिदिन नए–नए वाद–विवाद देखने–सुनने को मिल जाते हैं । व्यक्ति अपने दृष्टिकोण से एक बात को सही सिद्ध  करने पर तुला है, वहीं दूसरी पार्टी का प्रवक्ता उसी बात को आंकड़ों तथा तर्क द्वारा गलत सिद्ध करने का प्रयास करता है, जिसको हम प्रतिदिन विभिन्न टीवी चैनलों पर भी देखते हैं । जनता मौन होकर पूरा दृश्य देखती है और क्या सही क्या गलत इस पर मंथन करने का प्रयास करती है ।

एक हल्ला नोटबंदी का हुआ जो दो वर्ष बाद भी राजनीति के गलिहारों में जोर–शोर से उछल रहा है, पक्ष उसकी कामयाबी, विपक्ष विफलता की दुदुंभी बजा रहा है ।  जीएसटी पर मध्यम वर्ग के व्यापारी भी अपने को असमंजस में महसूस कर रहे हैं ।

पिछले दिनों तो देश आश्चर्य में था जब समाचारों की हैडिंग थी, सीबीआई पर सीबीआई का छापा । इस पर हँसे या बेचारगी महसूस करें ?

खैर ! जो भी हो, जनता जनार्दन है भाई ।  पाँच राज्यों — मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना, मिजोरम में विधान सभा चुनाव होने हैं जिसकी तैयारियां चल रही हैं । रैलियों का दौर शुरू हो रहा है । उसमें भी सभी पार्टियाँ अपने–अपने दृष्टिकोण एवं फायदे के अनुसार जनता को चुनावी गणित बताएंगे । परन्तु ये जो पब्लिक है, सब जानती है । अपना अच्छा क्या , बुरा है क्या, सब पहचानती है ।

इन पांचों राज्यों के नतीजों से एक बार देश का मूढ भी आंका जाएगा ।––––सन् 2019 की राह कितनी सरल होगी अथवा कठिन ।

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