प्यार का दरिया

आती  हुई  हवाओं को, तुम निर्बाध बहने दो।

कुछ  सवालों  को, बस  सवाल  ही रहने दो।।

 

इतनी  भी  दूरियाँ,  अपने  दरमियाँ  मत रहने दो।

बैठो मेरे पास कुछ पल, कुछ हमें भी तो कहने दो।।

 

दोस्तों,  जमीं  को  जमीं और आसमाँ को आसमाँ रहने दो।

बाँटों न आदम जात को फिरकों में उसे बस इंसान रहने दो।।

 

कुछ  अपनी  सुनाओ,  कुछ  हमें  भी  तो  यार  कहने  दो।

ठूँसों नहीं सब कुछ, दिमागों को कुछ खाली भी रहने दो।।

 

लिखी गई है जो दास्ताँ जमाने की, उसे बस यूँ ही पड़े रहने दो।

पढ़ लेंगी पीढ़ियाँ खुद से ही, इतिहास को बस इतिहास रहने दो।।

 

माझी मत लाओ कश्ती को किनारे, मझधार में ही रहने दो।

मनों में बैर बहुत है आजकल, प्यार के दरिया को बहने दो।।

 

©डॉ मनोज कुमार “मन”

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