भारत विकास परिषद् सृष्टि शाखा द्वारा विराट एवं अविस्मरणीय कवि सम्मेलन

भारत विकास परिषद् सृष्टि शाखा द्वारा विराट एवं अविस्मरणीय कवि सम्मेलन

न हिम्मत हारना कितनी बड़ी ही आपदा आए – कवि अशोक गोयल

भारत विकास परिषद् सृष्टि शाखा पिलखुवा द्वारा आँन लाइन विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया l यह आयोजन सृष्टि शाखा द्वारा संस्कृति सप्ताह के प्रथम दिवस माँ भारती के श्रेष्ठ कलमकारों को लेकर बड़े ही आनंद व हर्षोल्लास के साथ मनायाl कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ कवि डॉ वागीश दिनकर जी रहे l कार्यक्रम मेँ मुख्य अतिथि प्रांतीय अध्यक्ष श्री मतीममता शर्मा रही l कार्यक्रम का सुन्दर सञ्चालन कवि अशोक गोयल ने किया l कार्यक्रम की शरुआत माँ शारदे वंदना से कवयित्री बीना गोयल ने की l वरिष्ठ कवि डॉ वागीश दिनकर ने अपनी रचना मेँ कहा -जो देश के लिए जिये उन्हें प्रणाम है l कवयित्री स्नेह लता भारती ने अपनी रचना मेँ पढ़ा -आज जाने ये कैसी हवा चल गईं मेरे दीपक से ही मेरा घर जल गया कवयित्री बीना गोयल ने माँ पर अपनी रचना को जैसे ही पढ़ा सम्पूर्ण पटल तालियों से गुंजायमान हो गया उन्होने पढ़ा -इतना प्यार करेगा कौन जितना माँ करती है बेटा जब परदेश को जाय माँ रोया करती है lकवयित्री कल्पना कौशिक ने पढ़ा -मेँ सोन चिरैया आँगन की मुझको दुनिया मेँ आने दो l वरिष्ठ कवि अशोक गोयल ने पढ़ा -न हिम्मत हारना कितनी बड़ी ही आपदा आए, न पग पीछे हटाना लक्षय जीवन का बिना पाए lबुलंदशहर से कवि देवेंद्र मिर्जापुरी ने पढ़ा -भेद मत करो बेटों और बेटियों मेँ तुम l देव भूमि उत्तराखंड से कवयित्री कविता विष्ट ने अपनी रचना को पढ़ा -मेँ नहीं गाती मेरे स्वर मेँ, संगीत उनका गाता है l कवि राजीव गोयल ने पढ़ा -हमारा दिल तुम्हारा दिल यह एक हो जय l कवयित्री अर्चना गुप्ता मुरादाबाद ने पढ़ा -मेरे अंदर जो बहती है उस नदियां की धार पिता l कवि अटल मुरादाबादी ने पढ़ा -नाम मेरा कोरोना है अपना भी तुम बतलाओ lकार्यक्रम मेँ नीरा कंसल, रानी बंसल, लविता बंसल, मीनाक्षी गोयल, गुंजन कंसल, कोमल कंसल, कुसुमलता गुप्ता, प्रीति गोयल, पायल बंसल, इंदु वार्ष्णेय, आभा जिंदल, बिजेंद्र गर्ग, योगेश वसिष्ठ, रेणु बंसल के अतिरिक्त अनेक साहित्यकार व गणमान्य कार्यक्रम मेँ शामिल हुए l

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