विभिन्न प्रदेशों से जुड़े साहित्यकारों के साझा संकलन 1. काव्य अमृत 2. कथा संचय 3. सीप में मोती 4. हास परिहास 5. दिव्य चेतना का लोकार्पण विश्व विख्यात कवयित्री डॉक्टर सरोजिनी प्रीतम, प्रसिद्ध गीतकार, पत्रकार पंकज शर्मा जी , राष्ट्रीय हास्य कवि महेंदर शर्मा जी , कविता मल्होत्राजी , मधु […]

करली बहुत शैतानी, अब तो स्कूल जाना हैकरके खूब पढ़ाई, दुनियाँ में नाम कमाना है। आज जन्म की तीसरी वर्षगाँठ है। पिता का नाम-       रोहित त्रिपाठीदादा का नाम-       एनजी त्रिपाठी,कवि,लेखक व                          व्यंगकारजन्म           –       देवशयनी एकादशीनिवास         –       नई दिल्ली अनुराधा प्रकाशन , उत्कर्ष मेल परिवार की और से ‘यश’ को आशीर्वाद […]

रामभरोसे शहर नया-नया आया था।वह एक सड़क से गुजर रहा था। एक सोसायटी के सामने बहुत ही हो हल्ला हो रहा था। काफी भीड़ जमा थी।  रामभरोसे की भी मामले को जानने की उत्सुकता बढ़ी, वह भीड़ के पास गया और एक आदमी से पूछा, भाई क्या हुआ? आदमी बोला, […]

माँ जीवन का सार है, माँ है तो संसार। माँ बिन जीवनलालका,समझो है बेकार।1।   माँ की ममता धरा पर, सबसे है अनमोल। माँ जिसने भूला दिया,सब कुछ उसका गोल।2।   माँ सम गुरू नहीं मिले, ढ़ूढ़े इस संसार। गुरु का जो मान रखा,नैया उसका पार।3।   माँ के दूध […]

ना रहे किसी भी रूह में, मैं मेरी की हवस उतरे हर दिल में इश्क ए इब़ादत, तो मने समस्त ब्रह्माण्ड में बसँती एक प्रेम दिवस कितने भाग्यशाली होते हैं वो बच्चे जिन्हें उच्च शिक्षा के अवसर अपने देश में भी मिलते हैं और विदेशों में भी।अगर समाज के ये […]

शमिता के ससुराल मैं कोहराम मचा हुआ था। जो कोई आता सहानुभूति के साथ-साथ दो टूक शब्द ऐसे कह जाता जो कलेजे को अंदर तक चीर जाते। शमिता के आँख के आँसू तो अब जैसे सूख गये थे, बस मूर्तिवत आने-जाने वालों को देखती रहती। कोई कहता” अरे पहाड़ सी […]

सुरों की बज़्म सजाओ नहीं तो चुप बैठो, ग़ज़ल के शेर सुनाओ नहीं तो चुप बैठो। है कौन चोर इधर  कौन चौकीदार इधर, उन्हें पकड़ के बताओ नहीं तो चुप बैठो। मज़ा खराब करो मत फ़िज़ूल बातों से, ज़रा सी और पिलाओ नहीं तो चुप बैठो। चले तो आये हो […]

यूँ तो बहुत सी चीज़ें अच्छी लगती हैं, उसे अच्छा लगते रहने को बरक़रार रखने के लिए भी, बहुत सी चीजों का साथ चाहिए जैसे- मौसम का साथ,मिज़ाज का साथ,साथियों का साथ,माहौल , तालुक्कात,रवायत और दिल में ढेर सारा प्यार और जज़्बा……… आसान तो नहीं सब कुछ पा लेना आसान […]

दीपू ज्यादातर विद्यालय में देरी से ही पहुँचता था । देर से आने वाले बच्चों की अलग लाइन बनवाई जाती है तथा उनका नाम भी उनकी कक्षा के अनुसार लिखा जाता है ताकि उनके कक्षाध्यापक उन्हें जान सकें और समझा सकें । उस रजिस्टर में नवीं कक्षा में पढ़ने वाले […]

दैर-ओ-हरम में रहने वाले तू जाने क्या पीर मेरी जरा निकल तो दिखलाऊंगा कैसी है तदबीर मेरी दैर-ओ-हरम में………. तुझको ढूंढा सहरा-सहरा, तुझको खोजा गली-गली कहीं मिला ना तू ऐ मालिक पत्थर की सी बूत ही मिली कैसे हाल सुनाता तुझको ऐ पत्थर दिल ओ रे पीर तुझसे तो अच्छा […]