डॉ. सरोजिनी प्रीतम

कपाल क्रिया
तिनका तिनका जोडकर बिटिया दीन्ही ब्याह
डोली में भेजी. अर्थी पर; दीन्हीं तुरंत लौटा
जलाने जाना काशी
सूली
तिलक माला लाये. किया,, किया चंदन से अभिषेक
बलि के बकरे सी हुई, दुल्हन की गति देख
खुशी से फूली फूली
चढेगी हंस हंस सूली
अस्थी कलश
अस्थी कलश में,
तत्काल सेवाओं के, स्पष्ट हुए तब अर्थ
डोली अस्थी कलश में, तुरंत हुई परिणत
तकि-गंगा स्नान को जाए
प्रवाहित कर के आयें
औघड
बिना दहेज होगा यही दुल्हन का हाल
मरघट तो ससुराल है और दुल्हा चंडाल
किसी ने क्यों न रोका
कपाल औघड को सौंपा ?
क्रिया कर्म
क्रिया कर्म और ब्याह का मिटता जाता भेद
जोडा लाल पहन , दुल्हन हुई सफेद
साक्षी मैं- भुक्तभोगी
कपाल क्रिया तो होगी
सिक्के
अध्यापिका ने छात्रों को
सोलह आने सच का मुहावरा
जब बार बार समझाया
’आने‘ के पुराने सिक्के के बारे में बतलाया
तोे ’आने के सिक्के-जाने के सिक्के‘
कह-कह कर छात्र हंसे
सिर पीटकर अध्यापिका बोेली
’छोडो यह मुहावरा
वे सोलहों आने तो खर्च हो चुके।‘
 
अध्र्य
चांद पर पानी का सुनते ही
वैज्ञानिक की पत्नी बोली
ज्यादा खुश होनी की जरूरत नहीं है।
जिसे आप लोग अपना अविष्कार समझकर
श्रेय ले रहे हैं…..
वस्तुतः करवा चैथ के दिन-हम जो चांद को
अघ्र्य देती रही……वह यही है।
हताश
जिंदगी का मुहावरा समझ नहीं आ रहा
मन में निराशा घर कर रही है,
तथा
घर भी-मकान होता जा रहा ।
बैंड
निराश पिता बोले……
कन्या के लिए वर खोजते खोजते
हम तो अधा गये-
वो लोग हमारा बैंड बजा गये
शालीन
सौर उर्जा अधिकारी
उनकी उम्र के बारे में पूछने से सकुचाये
शालीनतावश बोेले-
‘आपने बाल-धूप में सफेद किये
या-धूप में सुखाये?’
यान्त्रिक
आदर्श विवाह का मूलमंत्र
दूल्हा – मां बाप के लिए श्रवण कुमार हो
-पत्नी के लिए श्रवण यन्त्र।
गुण
उसने सहेली से कहा
मेरे पति बहरे हैं यह तो मुझे
छः महीने बाद पता चला
सहेली हंस कर बोली यों
बोलने का मौका देकर देख लो
शायद गूंगंे भी हों।
सैंडिल
सिन्डैला की सैंडिल सीने से लगाये
चैराहे पर जा खडे हुए तो-
किसी ने उन्हें टौका – स्थिति यही रहेगी
पहले ही हाथ में जूता लिए खडे हो
कोई भी कन्या पास न फटकेगी ।
दलाल
उसने उनसे उनके व्यवसाय की बात पूछी
बोली-घर की मुर्गी दाल बराबर
और आप दाल के व्यपारी…छि…छि…

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