पश्चिम बंगाल बनाम अश्वमेध यज्ञ

पश्चिम बंगाल बनाम अश्वमेध यज्ञ

  कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

पश्चिम बंगाल की सड़कों पर युद्ध जैसा नजारा है नेता कवच कुंडंल धारण कर तैयार हो चुके हैं । दो सेनायें, एक केन्द्र की और एक राज्य की एक दूसरे के सामने सीना तानकर खड़ी हैं । अभी ‘‘ललकार’’’ वाला युद्ध लड़ा जा रहा है फिर ईव्हीएम से युद्ध लड़ा जायेगा । ललकार वाले युद्ध में दोनों सेनाओं के सेनापति दहाड़ रहे हैं, एक आरोप लगता है और दूसरा प्रतिआरोप लगाता है । एक दूसरे की सेनाओं से चुन-चुन कर योद्धाओं को अपनी ओर खींचा जा रहा है ‘‘आ जा तुझे जमींदार बना दिया जायेगा नहीं तो किसी गांव की मालगुजारी दे दी जायेगी’’ । कुर्सी के आकर्षण में कुछ लोग इधर से उधर जा रहे हैं और कुछ उधर से इधर आ रहे हैं, अफरा‘तफरी का माहौल है । एक राज्य की सत्ता के लिये युद्ध है आश्चर्य होता है । इतिहास में बहुत सारे युद्ध बहुत प्रसिद्ध रहे हैं, जिन्हें रट-रट कर बच्चे परेशान भी होते रहे हैं । अब 21 वीं सदी में एक और युद्धनुमा चुनाव लडने की बृहद तैयारी की जा रही है । इस युद्ध को जीत लेने के बाद अश्वमेध यज्ञ का संकल्प पूरा होगा । देश के हर कोने में सत्ता चाहिए, जो सर्मपण कर दे तो ठीक है वरना साम-दाम-दण्ड-भेद तो हमारे नैतिक ग्रंथों में भी परिभाषित कर दिए गए हैं इन्हें आजमा लो । बच्चे स्कूल में कुर्सी दौड़ खेलते हैं । कुर्सियां कम होती हैं और उसमें बैठने की चाह रखने वाले ज्यादा । सभी कुर्सी के चारों ओर चक्कर लगाते रहते हैं, बाजू में संगीत बजता रहता है जैसे ही संगीत की ध्वनि आनी बंद हो जाए तो झपटकर कुर्सी पर बैठना होता है, सभी झपटते हैं पर कोई एक तो कुर्सी से वंचित हो ही जाता है । देश में भी कुर्सी दौड़ चल रही है, संगीत बज रहा है सभी कुर्सी के चारों ओर दौड़ रहे हैं, जैसे ही संगीत की धुन बंद होती है किसी एक को छोड़कर सारे लोग कुर्सी पर बैठ जाते हैं, अंत में कोई एक ऐसा होता है जो कुर्सी का विजेता बन जाता है । विजेता वह ही बनता है जिसमें कुर्सी को छीन लेने की शक्ति होती है । वह धक्का देकर भी कुर्सी छीन सकता है, वह दूसरों को गिरा कर कुर्सी पर बैठ जाता है । पश्चिम बंगाल में कुर्सी दौड़ चल रही है । हर कोई तैयार होकर कुर्सी को पाने की ललक से उतावला है । कुर्सी का स्वंयवर है, पर इस स्वंयवर में कुर्सी को यह अधिकार नहीं है कि वह अपना वरण खुद कर ले । जयमाला तो उन्हें डालना है जो कुर्सी की दौड़ में आगे निकल जायेगा । आगे निकलने के चक्कर में वह किसी को भी गिरा दे, किसी को भी मार दे, किसी को भी ललकार दे । जब उतवालापन होता है तब समस्यायें मायने नहीं रखतीं । उन्होने ‘‘कोरोना’’ को कह दिया है कि अभी तुम देश के बाकी हिस्सों में अपनी जादूगिरी दिखाओ, केवल पश्चिम बंगाल को छोड़ दो । जहां-जहां कुर्सी की लड़ाई होती है वहीं से कोरोना को अवकाश दे दिया जाता है । कोरोना को बाहर भेजकर वे खुलेमन से कुर्सी की लड़ाई लड़ते रहते हैं । वैसे तो बेचारा कोरोना खुद ही ऐसी लड़ाई को देखकर भाग जाता होगा, वो ठहरा शांतिप्रिय, वह तो चुपाचाप आता है और किसी एक के गले में जाकर बैठ जाता है, फिर इस एक अकेले के गले से होता हुआ वह शांति के साथ अन्य लोगों के घरों की चैखट तक पहुंचता रहता है । शुरू में तो काई जान ही नहीं पाता कि कोरोना उसके शरीर में प्रवेश कर गया है । बेचारा मौन-खामोश रहने वाला जीव, चुनावों की चक्कलस से खुद ही घबरा जाता होगा और भाग लेता होगा । वह ऐसे ही बिहार से भागा, वह ऐसे ही मध्यप्रदेश के चुनावों से डरकर भागा और अब ऐसे ही पश्चिम बंगाल से भी भाग गया होगा तभी तो भारी भीड़ में भी सभी निश्चिंतता के साथ एक दूसरे के साथ सटकर सेल्फी ले रहे हैं, दो गज की दूरी का कोराना का नारा ‘‘हमें कुर्सी चाहिए’’ के नारों में गुम हो गया दिखाई देने लगा । कहते हैं छोटे दर्द को दूर करने के लिए बड़ा दर्द गले लगा लो । कोरोना से बड़ा दर्द चुनाव है । कोरोना तो आज है कल चला ही जायेगा पर चुनाव तो पांच सालों में एक बार ही आयेगा न । जो कुर्सी पर बैठेगा वह पांच सालों तक हिलेगा तक नहीं तो भला एक जरा से कोरोना कें लिए चुनाव का युद्ध न लड़ें । मास्क पहने मुख से नारों की आवाज बुलंद नहीं हो सकती, मास्क उतारकर ही तो दहाड़ा जा सकता है । अब चुनावों में दहाड़ना मायने रखने लगा है, पहिले चुनाव में विकास का लालीपाप मायने रखता था पर वो 20 वीं सदी थी ‘‘ओल्ड सदी’’ । अब नई सदी है अब सोशसल मीडिया वाली सदी है । एक बार मुस्कान डाउनलोड कर लो फिर उस मुस्कान के साथ किसी भी तरह का मुंह बनाकर दहाड़ते रहो । दहाड़ने के लिए मास्क उतारना जरूरी है, दहाड़ को सुनकर प्रतिदहाड़ लगाने के लिये भी मास्क उतारना जरूरी है, जिनके सामने दहाड़ना है उनको दो गज की दूरी का फासला मिटाना जरूर है । सारे फासले मिटते जा रहे हैं । चुनाव आते-आते तक वहां समझ में ही नहीं आयेगा कि कोरोना भी कोई बीमारी है । देश के बाकी लोग मास्क लगाकर घूमते दिखाई देगें । वे मास्क नहीं लगायेंगें तो प्रशासान उनसे जुर्माना वसूलेगा । वे जुर्माना भरते हुए चुनावों की भारी भीड़ में मास्क पहने लोगों को ढूंढेगें । पश्चिम बंगाल का चुनाव प्लासी के युद्ध से भयानक होता दिखाई दे रहा है । कौन जीतेगा कयास लगाये जा रहे हैं । कोइ्र एक तो जीतेगा ही । एक का जीत वाला अश्व घूमेगा और फिर अश्वमेध यज्ञ की ओर अग्रसर होगा । युद्ध के चक्कर में दिल्ली की बार्डर में डटे किसान भी विस्मृत होते जा रहे हैं । किसान जिद्द पर हैं, छिः गंदी बात जिद्द करते हो । जिद्द छोड़ो और चुनाव के नजारे देखने में लग जाओ । आंदोलन, धरना प्रदर्शन तो तब ही अच्छा लगता है जब कोई काम न हो अभी तो चुनाव का काम सिर पर है सारे लोग व्यस्त हैं, सारे लोग अश्वमेध यज्ञ के घोड़े के पीछे सेना के साथ चल रहे हैं तुम्हारी ओर देखने की फुरसत ही किस को है । बैठे रहो जब तक बैठे रहना है, जब मन भर जाए तो उठ जाना और अपने-अपने घरों की ओर चले जाना । अभी तो केवल एक ही लक्ष्य है अश्वमेध यज्ञ ।

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