प्रकाश उत्सव मनाएँ

प्रकाश उत्सव मनाएँ

कविता मल्होत्रा

गुरू का अभिमान शिष्य बने इँसान

मानव धर्म है मानवता का ही उत्थान

गुरू हम सबको बेहतर मानव बनने के लिए प्रेरित करें, यही सच्ची शिष्यता का मान भी है और गुरू का सम्मान भी।

मौसम कोई भी हो लेकिन सज सँवर कर जश्न मनाने का आनंद केवल उन्हीं लोगों से जाना जा सकता है, जो जीवन को एक उत्सव की तरह जीते हैं।अब ये सज्जा तन की हो या मन की, ये तो हर किसी का अपना चुनाव है।

जिस परिस्थिति और माहौल में व्यक्ति शिक्षा पाता है, उसके विचार वैसे ही हो जाते हैं।सँस्कार व्यक्ति की आत्मा में होते हैं और व्यभिचार व्यक्ति की कामना में।

भाव ही एक साधारण स्त्री के व्यक्तित्व को शबरी या शूर्पणखा बनाते हैं, इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है सही दिशा की तरफ़ पहला क़दम उठाना।दिशा सही हो तो बढ़ते क़दम व्यक्ति को मानवता के उत्थान की ही प्रेरणा देते हैं।

हर व्यक्ति के अंदर एक योद्धा साँसें लेता है लेकिन समाज की हिंसक घटनाएँ उस योद्धा को पथभ्रमित करके हिंसक शोषक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़तीं।अगर हर व्यक्ति को सँस्कारिक वातावरण में शिक्षित होने का अवसर मिले तो दूसरों पर हिंसा करने की बजाए हर व्यक्ति अपनी स्वार्थ रूपी बीमार मानसिकता के विरूद्ध एक युद्ध छेड़ कर अपने अहम को पराजित करने में सक्षम हो जाएगा।

हर बरस गुरूओं के प्रकाश उत्सवों पर कीर्तन या पाठ के आयोजन और लँगर के वितरण के साथ जयंतियों के जश्न मना कर समाज के ठेकेदार अपने दायित्वों की इति श्री समझ लेते हैं।लेकिन अपने भीतर निर्बाध रूप से बहते प्रकाश पुँज की वास्तविकता से अँजान होते हैं।

मानव जीवन का परम लक्ष्य है, खुद की खोज, लेकिन मनुष्य सारा जीवन दूसरों को जानने की जिज्ञासा में नष्ट कर लेता है।

प्रेम से उत्पन्न मानव जीवन का लक्ष्य है प्रेम बनकर प्रेम के लिए जीना और प्रेम ही बाँटना। लेकिन आत्मा के स्तर से देह के स्तर पर उतर कर प्रेम वासना बन जाता है।जिसे पाने के लिए और स्थायी स्वामित्व जताने के लिए अनगिनत फ़साद खड़े हो जाते हैं।जबकि प्रकृति हर किसी को दिन रात निस्वार्थ प्रेम के अनेकों सँदेश निःशुल्क देती रहती है।अब कोई लेना ही न चाहे तो अलग बात है।

निस्वार्थता का प्रकाश हर रूह का अनमोल ख़ज़ाना है

स्वार्थी प्रवृत्ति वालों के लिए तेरी मेरी का ही पैमाना है

निष्काम सेवा का मार्ग ही भक्त का इश्क सूफ़ियाना है

क्यूँ न अब के बरस खुद से खुद तक की यात्रा का आरँभ किया जाए, जो जीवन के सफर को भी उल्लासित करे और मानव जीवन के परम उद्देश्य को भी परिभाषित करे।

उत्कृष्टताएँ ही देखें हर किसी में

दोष अपनी कामनाओं के मिटाएँ

निस्वार्थता के क़ायदे पढ़ें-पढ़ाएँ

नेक कमाइयाँ कर बाँटकर खाएँ

वासनाओं के अँधियारे मिटा कर

जागृतिओं के प्रकाशोत्सव मनाएँ

Special Article