बातों से कब बात बनी है….(सम्पादकीय) मनमोहन शर्मा ‘शरण’

बातों से कब बात बनी है….(सम्पादकीय) मनमोहन शर्मा ‘शरण’

अगस्त माह में अनेक त्यौहार–पर्व हैं जिनके द्वारा सांस्कृतिक, संस्कारिक, आ/यात्मिक एवं राष्ट्रीय मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है ।
रक्षा–बंधन, जहां भाई–बहन के प्यार–विश्वास और संकल्प की खुश्बू आती है तो वहीं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आ/यात्मिक चिंतन का महापर्व आएगा जिसमें जीवन जीने की कला हम जानते हैं । 15 अगस्त राष्ट्रीय चिंतन एवं देशभक्ति के जज्बे को जानने–समझने तथा अपनाने का अवसर है जब हम उन महान दिवय आत्माओं को स्मरण करते हैं जिन्होंने अपने देश को आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया । तब और अब कितना परिवर्तन आ गया है मानव की सोच में । तब (आजादी से पूर्व) नेताओं में देशसेवा–मानव की सेवा का जज्बा होता था । उनमें जीवन मूल्य–संस्कार होते थे, क्योंकि उनकी सोच थी, सबसे पहले देश हित । किन्तु आज राजनीति जिसमें ‘राज़’ बहुत हैं जिनके लिए कभी होटलों में कभी रिजोर्ट्स में जाकर छिपना पड़ता है । और ‘नीति’ तो शायद कुछ बची ही नहीं । एक पक्ष सब कुछ हड़पना चाहता है और दूसरे पक्ष में से वे लोग जो अति महत्वाकांक्षी होते हैं कुछ समय के लिए अपना भविष्य कहीं और अधिक सुरक्षित महसूस करता देख भाव–तोल पर उतारू हो जाते हैं ।
‘कोरोना’ की रफ्तार भारत में दिनोंदिन तीव्र गति से बढ़ती जा रही है । कल (30 जुलाई) एक ही दिन में 55 हजार संक्रमित पाए गये तथा पूरे भारत में संक्रमितों की संख्या 16–50 लाख के पार जा पहुंची है । चीन और चीन के भेजे ‘कोरोना’ का बन्दोबस्त किए बिना राह आसान होने वाली नहीं है । चीन को कई मोर्चों पर घेरा और कई जगह पटखनी भी दी यमोबाइल ऐप पर पाबंदी, टेंडर केंसिल किया जाना, रंगीन टेलीविजन पर रोक ादिद्ध किंतु जैसे कोरोना वायरस की वैक्सीन के बिना उसे रोक पाना मुश्किल है उसी प्रकार चाइना आर्मी जब तक अपने कदम पीछे नहीं हटाती तब तक हमें चैन की सांस नहीं लेनी है । बातों से बात बनने वाली नहीं है–––––

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