बातों से बात नहीं बनने वाली

बातों से बात नहीं बनने वाली

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’)

सुर्खियां थीं कि अब शिवसेना– एनसीपी–कांग्रेस के तिपहिया रथ पर सरकार बनने जा रही है । और रातों रात समीकरण बदले और अगले दिन भाजपा की सरकार बन चुकी थी, देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके थे । ऐसी क्या जल्दी थी कुर्सी/सत्ता की ।

यहां तक शिव सेना के भविष्य के प्रति तमाम अटकलें लगाई जाने लगीं कि अब भविष्य औंधें मुंए गिरता दिखाई दे रहा है । लेकिन फिर कोई चाणक्य अपनी चाल से सबको चैंका देता है और बाजी पलट जाती है । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बन जाते हैं । इस पूरे प्रकरण पर भाजपा को यह गाना अवश्य याद आया होगा कि सरकार बनाने में जो जल्दबाजी की उसमें मानो हाथ जला बैठे और लगा कि ‘यारो मैंने पंगा ले लिया’–––
मित्रे! अब दो बड़ी महत्त्वपूर्ण बातों की चर्चा करने जा रहा हूं जिनमें एक बात ही उभर कर आ रही है कि बातों से बात नहीं बनने वाली । काम तो जमीन पर ही करके दिखाना होगा । एक— मोदी सरकार बनी, हम शक्तिशाली हैं, गौरवशाली हैं कहकर पड़ोसियों को अपने डोले भी दिखाए और सर्जिकल स्ट्राइक आदि के नाम पर पीठ भी थपथपाई पर आतंकी घटनाएं तो अभी भी हा ही रही हैं । विशेष बात यह कि देशवासी/आम जनता एक टक लगाए निहार रही है कि उसे कुछ राहत मिले लेकिन महंगाई आसमान पर और जीडीपी जमीन पर––– समाधान ढूंढो यही एक उपाय है । दूसरा — हम कहते रहे, लिखते रहे……प्रवचन देते रहे कि जहां नारी की पूजा / आदर होता है, वहां देवता निवास करते हैं । लेकिन वास्तविकता क्या है ‘निर्भया’ गई, आवाज उठी, आन्दोलन हुए लेकिन अभी भी यह दुष्कर्म निरंतर जारी है । हैदराबाद में हुई डॉ– प्रियंका के साथ दर्दनाक दुष्कर्म इसका प्रबंल उदाहरण है । कानून–पुलिस की बातें तो होती रहेंगी लेकिन आज इंसानियत कहां है । दरिंदों ने हैवानियत की और जलाकर फेंक दिया । सब कुछ खत्म !!! एक होनहार उज्ज्वल भविष्य को अन्धकार में झौंक दिया और उसका दुखद कर दिया गया । जन जन के भीतर से चींख–चींख कर आवाज निकल रही है कि बातों से बात बनने वाली नहीं है । इसके लिए सख्त कानून बनाने होंगे और संस्कार–संस्कृति का बाल–बालिकाओं में पोषण करना होगा । इसके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र सरकार को ठोस रणनीति बनाकर कार्य करना होगा । वरना ? ? ? ?

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