भाजपा को अब संजीवनी की जरूरत !

भाजपा को अब संजीवनी की जरूरत !

भाजपा ने जहां – जहां रिक्त स्थान छोड़ा वहा – वहा उसे मुंह की खानी पड़ी । एक – एक करके सात राज्य हाथ से निकल गए , कारण सिर्फ एक था कि इनके पास उन जगहों पर कोई योग्य  कद्दावर नेता नहीं मिला जिसे विधानसभा दल का नेता घोषित करके चुनाव  लड़ा जाय, जिसे मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करके आश्वस्त रहा जा सके  । मै मनोज तिवारी ,रमन सिंह और एम पी के मामू को कभी इस लायक नहीं समझता कि वो केंद्र से संचालित राजनीति में फिट हो सकते है , ये तीनों नेता स्तरहीन साबित हुए है । क्योंकि इन्होंने जुबान पर से नियंत्रण खोना शुरू कर दिया । मै मनोज तिवारी को तो बिल्कुल भाजपा के लायक नहीं मानता क्युकी आप गाना गाकर और लोगो की झोपड़ी में जाकर केवल स्टंट कर सकते है राजनीति नहीं कर सकते । दिल्ली के चुनाव में विकास की जीत है या नफ़रत और सांप्रदायिकता की ये तो वक्त बताएगा । वैसे विश्लेषण करू तो  यह जीत केजरीवाल की जीत नहीं , एक विचारधारा के आंदोलन बनने और उस आंदोलन की सत्ता में पुन: वापसी भर है या दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के शिखर पुरुषों से लेकर भारत सरकार के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों के समूहों, सांसदों, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों या यूं कहें कि पूरी भारत(भाजपा)सरकार की, ताकत के चरम पर, एक आम आदमी से हार नहीं  है , बल्कि कांग्रेस मुक्त भारत की ओर एक और कदम है । 

यदि भाजपा दिल्ली सत्ता में आती  तो जरूर कांग्रेस का भी खाता खुलता और कांग्रेस जीवित होने की कोशिश करती किन्तु दिल्ली की जनता कहीं अधिक समझदार है क्युकी भाजपा के पास कोई मुख्यमंत्री फेस था नहीं इसलिए उन्होंने केजरीवाल के साथ जाना ठीक समझा । वह आम आदमी नेता , जिसने भाजपा को हमेशा   आतंकवादी बताया, तो दिल्ली ने उसे अपने दिल में बैठाया। वह दिल्ली,जो कितनी बार लूटी,बिखरी और बसी। वह दिल्ली जो एक समय में हिन्दुस्तान की तख़्ते ताऊस थी। वह दिल्ली जो हमारे समय में एक पूरा मिनी हिन्दुस्तान है। वह रायसीना हिल्स, जिसे लुटियंस की परिकल्पना ने गढ़ा, आज उसे आंदोलन की पैदाइश एक नेता ने गढ़ने की एक ईमानदाराना कोशिश भर की है और दिल्ली ने उसे अपना दिल ही नहीं,बल्कि जनादेश भी दे दिया। 

आखिर दिल्ली चुनाव के सियासी संदेश क्या हैं। क्या यह देश के सियासी मिजाज का संदेश है या हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण, नागरिकता संशोधन कानून पर हिंदुओ का बिखराव,शाहिनबाग मुद्दे पर इस्लामियत की एकजुटता का नतीजा , बेरोजगारी और नफ़रत को  राजनीति का मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने को हासिल किया वो सबके सामने है , पर मिनी भारत का हिंदुत्व के लोकतांत्रिक सोच पर  कुठाराघात  है। जो भी हो, लेकिन रायसीना की पहाडि़यों की प्रतिध्वनि, हिंदुस्तान की अनुगूंजें बनने में देर नहीं लगेगीं। 

सच तो यह है कि आज के समय की राजनीति प्रतीकों और संदेशों भर से नहीं चलती है, वह सत्ता से नागरिकों के साथ वायदों और जनहित के मुद्दों की डिलवरी की चाहत भी रखती हैं। उसे मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम और नफ़रत की सियासत नहीं बल्कि विकास और रोजगार की दरकार है। यह, कम से कम दिल्ली जैसा राज्य जरूर सोचता और महसूस करता है। आप नेता अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के दिल में जो जगह बनायीं वो सोचने पर मजबूर कर रही की क्या सब कुछ फ्री फ्री करके हिंदुओ पर हिंदुस्तान पर और यहां की मासूम जनता पर राज किया जा सकता है ,कांग्रेस नफरत और बंटवारे की सियासत से राज करना सीखाते सीखाते आज देश से अस्तित्वहीन होने के कगार पर है । 

देश का  मुसलमान भाजपा से नहीं बल्कि अपने ही कौम के विषैले राजनेताओं से डरी है   और पाकिस्तान से जो पार्टी पोषित है उसके नेता सदन में बिल फाड़ते नजर भी आ जाते है । बाहरी मुल्क की अपेक्षा  शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर जमीनी स्तर पर कार्य करने में भारत अग्रणी है  ।शिक्षा क्षेत्र में मनीष सिसोदिया और आप सरकार ने विज्ञापनों में जिस तरह सरकारी विद्यालयों को निजी क्षेत्र के मुकाबले खड़ा करके उसका प्रचार किया वो हकीकत दिल्ली वाले जाने पर आप ने एक विज़नरी और मौकापरस्त सरकार की भूमिका निभाई, वह काबिलेतारीफ है। हर मुहल्ले को ‘मुहल्ला क्लिनिक’ कहकर पूरे देश की भरमाया गया जबकि ऐम्स आज भी भीड़ से लबरेज है । सबको  सुविधाओं से लैश कर देना आसान नहीं ।हर घर में बीस हजार लीटर पानी मुफ्त देना और बिजली मुफ्त देना आसान नहीं ।लेकिन विज्ञापन सरकार क्या होती है, वह दिल्ली ने एक मिसाल बनकर दिखा दिया।जबकि दिल्ली एक मिश्रित आबादी है और एक पूरा मिनी हिन्दुस्तान है।मोदी सरकार और भाजपा ही नहीं बल्कि संघ के लिए भी दिल्ली एक संदेश है। इस संदेश को भाजपा किस रूप में लेती है। यह तो वही जाने लेकिन दिल्ली यूं कहें कि एक मिनी भारत ने संदेश दे दिया है। उम्मीद है कि दिल्लीवासी और मुफ्त की तलाश छोड़ केजरीवाल को आगामी पांच वर्षों के लिए दिल्ली विकास के लिए खाका खींचने और दिल्ली को दिल्ली बनाने के लिए प्रेरित करेंगे । केजरीवाल को शुभकामनएं की आगामी साढ़े चार साल छोड़ सिर्फ छ महीने विकास कार्य का विज्ञापन करके अगली बार पुनः सत्ता प्राप्त करे ।

—– पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी 8808113709

Special Article